रचनाकार

माँ तुम्हें कोटि- कोटि नमन

@ पूनम गुप्ता, खिदिरपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल…

माँ तुम्हें कोटि- कोटि नमन।
चाहती हूँ चलना
तुम्हारे नक़्शे कदम।
पर जरूरी नहीं हो सही
तुम्हारे हर एक कदम।
चाहती बदलाव में
मैं कुछ नये कदम।
जिससे सुगम हो सके
मेरा भ्रमण।
माँ तुम्हें कोटि – कोटि नमन।

तुम्हारी किसी जिद पर
लगाती हूँ जब भी
मैं अंकुश,
तोड़ कर हर बेड़ियों को
थामती हूँ
जब नई मंजिल,
जरूरी नहीं तुम समझो
मुझे हरदम।
पर माँ मत रोको
हर कदम।
माँ तुमसे है मेरा निवेदन।

मुझे बढ़ना है आगे
टकरा कर
पथ के बाधाओं से।
छूना है सफलता को अब
अपने पंखुड़ी समान
कोमल हाथों से।
समझो जरा अब तो

भरोसा करो मुझपर,
बनो मेरी पथगामिनी
तुम हरदम।
माँ तुम्हें कोटि- कोटि नमन।

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