रामचरितमानस मनुष्य के जीवन की एक-एक क्षण को कलापूर्ण व परिवार को मर्यादाओं के एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है : श्री कमलेश जी महराज

मऊ। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एक मंदिर है जिसमें पवित्र एवं शुद्ध होकर प्रविष्ट किया जाता है जबकि ठीक इसके विपरीत गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री राम चरित मानस एक पवित्र मानसरोवर के समान है जिसमें प्रवेश करने मात्र से समग्र मानव समाज शुद्ध हो जाता है ।श्रीरामचरितमानस जीवन की एक प्रयोगशाला है जिसमें नित्य प्रति नए-नए खोज किए जाते हैं। उक्त विचार हैं श्री राम कथा वाचक तथा श्री सुंदरकांड पाठ परिवार के प्रमुख व श्री हनुमत कृपा सेवा समिति के प्रमुख श्री कमलेश जी महाराज के । वे नगर में फातिमा अस्पताल के पीछे इमलिया ग्राम स्थित नवनिर्मित श्री दुर्गा मंदिर में आयोजित होने वाले श्री राम कथा के अनंतर उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे। श्री कमलेश जी महाराज ने कहा कि संवत् 1631 नवमी तिथि की मंगलवार को गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस रामचरितमानस को जन समुदाय के हितों के लिए प्रकाशित किया। आज रामचरितमानस मनुष्य के जीवन की एक-एक क्षण को कलापूर्ण बनाने का कार्य करने के साथ साथ परिवार के सभी सदस्यों की मर्यादाओं को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है। श्रीरामचरितमानस की महिमा जितनी भी की जाए वह कम है मानस के प्रत्येक पात्रों के चरित्र को यदि देखा जाए तो निश्चित रूप से सुंदर समाज का निर्माण हो चाहे वह माता कौशल्या व सौतेली माता कैकेयी का अद्भुत प्रेम हो या श्री लक्ष्मण जी व भरत जी समेत चारों भाइयों का आपसी प्रेम हो श्री रामचरितमानस की एक एकवचनों पर चलने मात्र से नए सुंदर सहज एवं सरल समाज का निर्माण होता है। श्री महाराज ने कहा कि मां जानकी का श्री राम के प्रति अगाध प्रेम यह दर्शाता है कि श्री रामचंद्र जी वन में गए नहीं बल्कि बन गए अर्थात जब तक वह अयोध्यापुरी में थे तब तक राजा रामचंद्र जी थे लेकिन वन में जाने के पश्चात वापस आने पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी बन गए। उन्होंने कहा कि हम सब लोगों को भी मानस के प्रत्येक सोपान का जीवन में अनुसरण करके जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कार्यक्रम के प्रमुख रामप्रवेश चौहान डॉ राम पुकार सिंह दीनदयाल राय प्रमोद सिंह रमेश राय अमरीश राय तथा रणधीर सिंह की धर्मपत्नी तथा चंद्रशेखर अग्रवाल डॉक्टर रामगोपाल गुप्ता आदि मौजूद रहे।



