दूसरों को सताने के लिए किया गया तंत्र मंत्र का प्रयोग देता है उल्टा परिणाम

@ बी.के. मणि…
दूसरों को सताने के पहले यह जान लें कि ब्याज सहित आपको इसका मूल्य चुकाना पड़ेगा। बहुधा अपनी दबंगई कै जोर पर हम अपने को प्रबल पराक्रमी समझ बैठते हैं । पर इसी भ्रम में अनजाने में कुछ ऐसे काम हो जाते हैं जो हमें विधिवत दंड दे जाते हैं। इसी तरह तांत्रिक क्रियायें खुद अपने को दंड दे जाती है।
एक सज्जन को अपने पड़ोसी के प्रति बहुत जलन थी। संयोग से दोनो एक ही विभाग में वरिष्ठ लिपिक और कनिष्ठ लिपिक थे। एक दिन कनिष्ठ ने रामचरित मानस का अपने घर पाठ रखा। उसमें ऐसा संपुट लगा दिया जिससे शत्रु का नाश हो जाय। बड़ा आयोजन था। मुझे भी आमंत्रित किया गया। मानस पाठ जान कर मैं राजी हो गया । पर जब उनके घर गया तो संपुट सुन कर अन्य हैरान रह गया। मैने निर्णय लिया पाठ करुंगा नहीं, सिर्फ कुछ देर उनके घर बैठा रहूंगा। मुझे भय था इतने लोग सामूहिक पाठ कर रहे हैं जरुर कुछ न कुछ त्रुटि होगी जिसका परिणाम शुभ नहीं होगा। हुआ भी वही, पाठ समाप्त होने के पहले उनकी बहू सीढ़ियों पर पैर फिसलने से गिर गई और भतीजे को नंगी तार छूने से करंट लग गया। संयोग से किसी ने बिजली सप्लाई आफ कर दी, पर मुश्किल से जान बची। दोनों घटनाएं मुझे सबक दे गईं। यद्यपि उनका ध्यान इस पर नहीं गया। बलिष्ठ लिपिक सुरक्षित बच गए । इसी तरह पंजाब में एक घटना घटी.. जिसमें एक व्यक्ति पर मारण तंत्र का प्रयोग किया गया था। जिस पर प्रयोग किया गया वह इस विद्या का जानकार था। उसने तंत्र को वापस कर दिया। अपने आपको मंत्रों से सुरक्षित कर लिया। चार दिन मृत्यु तुल्य पीड़ा हुई, पर जान बच गई । उल्टे तंत्र कराने वाले उसके यजमान और सहायक को भयानक दंड मिला। जिसका विस्तार में उल्लेख कऱना उचित नहीं ।
तंत्र मंत्र और यंत्र को मामूली न समझे और किसी के अनिष्ट का कभी ख्याल न करे़। बेहतर है ऐसे अभिचार करने कराने वालों से दूर ही रहें। ईश्वर का नाम लें, शिव शक्ति, हनुमान ,दुर्गा जो भी आपके इष्ट हो उनके नाम का स्मरण करें। आप सुरक्षित रहेंगे। दान, पुण्य, तीर्थ स्नान संत सेवा करें और अभाव ग्रस्त की अपनी क्षमता के अनुसार मदद करें। परंतु सेवा लेने से यथा संभव गुरेज करें। किसी का अनिष्ट सपने में न सोचें।



