विधानसभा चुनाव 2022

नेताजी लोग! ऐसी आदतों से बचिए, सवाल का जवाब होता है, सवाल का सवाल नहीं होता है!

@ आनन्द कुमार…
आजकल नेताओं का एक अलग ट्रेन्ड चल गया है, नेता बड़ा हो या छोटा पत्रकार के सवाल पर ऐसे तपाक से सवाल करता है कि जो आप सवाल कर रहे हैं वह कोई लिख कर दिया है या मैसेज आया है। अपने सवालों से भागते हुए नेता इस तरह का सवाल कर आखिर कब तक बचते रहेंगे। नेता ऐसे पत्रकार के सवाल पर सवाल कर, आखिर पत्रकारों को क्या साबित करना चाहते हैं। चलो मानते हैं कि सवाल किसी ने लिख कर दिया ही होगा या भेजा होगा, सवाल वाजिब है तो सवाल का जवाब होता है न कि सवाल का सवाल होता है। अगर कोई पत्रकार आपसे पूछता है तो उसका जवाब देने में क्यों आपकी मुंह पर लगाम लग जाता है। खैर यह प्रचलन दिल्ली हो या लखनऊ या फिर कोई जनपद या फिर कोई विधानसभा क्षेत्र ऐसे सवालों से नेताओं का बचना और जवाब में उलट पत्रकारों से ही सवाल कर देना रोज की नियति हो गई है।
नेताजी, सवाल कोई लिख कर दिया हो या फिर मैसेज आया है यह नेताओं द्वारा सिर्फ अपने बचाव का एक पक्ष हो सकता है, उसका वाजिब उत्तर नहीं। नेता अपने द्वारा विकसित इस ट्रेंड को लाकर चाहे जितना प्रचलन कर लें। पत्रकारिता को बदनाम करने की कोशिश कर लें, लेकिन हर सवाल करना बदनामी की श्रेणी में नहीं आता है और हर सवाल पर संबंध नहीं निभाए जाते। लेकिन नेताओं को सवाल के पीछे का सवाल के आगे का और सवाल का सही मायने में अर्थ समझना होगा। उसका जवाब देना होगा तभी उनके स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का उनके लिए निर्माण होगा। वरना पत्रकारों का क्या वह तो सवाल करते रहेंगे आप बोलेंगे तो भी जनता के बीच में आपकी बात रखेंगे आप नहीं बोलेंगे तो भी जनता के बीच में आपकी बात रखेंगे। इसलिए नेताजी लोग ऐसी आदतों से बचिए सवाल का जवाब होता है सवाल का सवाल नहीं होता।

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