लद्युकथा : शो चलाते रहो

( शब्द मसीहा केदारनाथ )
“सर ! ये तो गज़ब हो रहा है…. सुप्रीम कोर्ट की ऐसी मजाल कि हमारी योजनाओं पर प्रश्न उठाए ।” पी ए बोला।
“क्या हो गया ?”
“सर! सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नेता लोग देश के टैक्स को ऐसे फ्री बिजली , फ्री राशन , फ्री लेपटॉप, फ्री स्कूटी में नहीं उड़ा सकते है। ये टैक्स देने वालों के साथ अन्याय है और कामचोरी को बढ़ावा है।” पी ए ने डिटेल में बताया।
“हा हा हा ….उस जज को कहो कि रिटायर होने के बाद राज्य सभा में सीट देंगे और कल एक रैली बुलाकर उसमें इस बात की चर्चा करो कि कोर्ट सरकार को गरीबों की सेवा नहीं करने दे रही है….. लोग खुद डरा देंगे उसे ….कोई जनता जनार्दन से ऊपर थोड़े ही है ….हा हा हा ।”
“वाह सर ….मुसीबत मैनेज करना तो कोई आपसे सीखे ….क्या मैनेज किया है इवेंट को।” पी ए बोला।
“अबे! तुम सिर्फ पी ए हो और मैं पी ….. हूँ । छिपकली को मगरमच्छ कहने से जनता सच मानती है तो खुलकर फेंको …. अपना काम तो सपने बेचना है हर एक की मनपसंद के ताकि हमारा सपना सुरक्षित रहे हमारे अपने भविष्य की तरह।”
“और जनता ?”
“उसे तमाशा पसंद है ….शो चलाते रहो ….हा हा हा ।”

