युवा साहित्यकार “सुशोभित” की एक दर्जन पुस्तकें

सुशोभित की कलम से…
आने वाले दिनों में मेरी कुछ नई किताबें एक-एक प्रकाशित होने जा रही हैं। इससे पहले मेरी 12 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इधर मुझे ख़याल आया कि मैंने एक अरसे से अपनी किताबों के बारे में पाठकों से कोई चर्चा नहीं की है, जैसे कि मैं भूल ही गया होऊँ कि मैं भी लिखता हूँ। बहुत समय से मेरी कोई नई किताब आई भी नहीं। अब इस अवसर पर मन में यह प्रतिश्रुति बनी है कि नई किताबों के पहले अपनी लेखकीय-यात्रा की एक रूपरेखा पाठकों के सम्मुख रखी जावे और उसका एक संक्षिप्त अवलोकन किया जावे। यह रूपरेखा उन पाठकों के लिए उपयोगी भी सिद्ध होगी, जो मेरी प्रकाशित पुस्तकों की अंतर्वस्तु के बारे में कौतूहल रखते हैं। अस्तु, आरम्भ करता हूँ।
1.
मैं बनूंगा गुलमोहर
लोकोदय प्रकाशन, 2018
प्रेम कविताओं और गद्यगीत की पुस्तक। प्रेमी एक-दूसरे को जैसी किताब भेंट करना चाहेंगे, वैसी पुस्तक। मेरे भीतर जो प्रणयी उस समय सजीव था- अब तो नहीं है- उसने अपनी सबसे कोमल और तीव्र अनुभूतियों को इस पुस्तक में संजोया था, इसी से गुलमोहर एक साथ रूमानी और ऐंद्रिक बन गई है। कोई तीनेक साल पहले जब यह प्रकाशित हुई तो पाठकों में बहुत लोकप्रिय हुई थी। इसकी कुछ पंक्तियाँ आज भी जहाँ-तहाँ उद्धृत की हुई मिल जाती हैं। कालान्तर में इसका दूसरा संस्करण आया, जिसमें कुछ नई रचनाएँ जोड़ी गईं। वर्तमान में इसका यह दूसरा संस्करण ही सुलभ है। गुलमोहर एक सुदूर की मीठी याद है। मैं उससे कहता हूँ जिसने तुझको रचा था, वह अब नहीं है, किंतु वह कभी था इसका तुझसे सुंदर स्मारक भला क्या हो सकता था?
2.
मलयगिरि का प्रेत
वाणी प्रकाशन, 2018
वर्ष 2017 के पतझड़ में मैंने अपनी कविताओं की दो जिल्दें तैयार की थीं- प्रेम कविताएँ और अन्य कविताएँ। पहली जिल्द कालान्तर में गुलमोहर बनकर आई। दूसरी जिल्द से मलयगिरि बनी। यह गुलमोहर के प्रकाशन के एक माह के भीतर ही छपकर आ गई थी। मेरी सभी पुस्तकों में यह सबसे अलोकप्रिय और कम पढ़ी गई है। इसका मूल्य भी अन्य से अधिक है। फिर भी जब-तब मलयगिरि का कोई प्रशंसक सामने आता है और मुझे चकित कर देता है। इस पुस्तक में कुछ सुंदर क्षण उपस्थित हुए हैं, जो लौटकर देखने पर अब भी मुझे रोमांचित करते हैं।
3.
माया का मालकौंस
यश पब्लिकेशंस, 2019
गुलमोहर-मलयगिरि द्वैत के कुछ महीनों के अंतराल से यह पुस्तक आई थी। इसके और माउथ ऑर्गन के बीच होड़ थी कि पहले कौन आएगी। अंततोगत्वा माउथ ऑर्गन ने इसके लिए रास्ता छोड़ा और यह पहले छपी। हिंदी फ़िल्म-गीतों पर आधारित यह पुस्तक मेरी सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में शुमार है, अलबत्ता अभी तक यह अपनी पूर्ण-सम्भावनाओं को अर्जित नहीं कर सकी है। आरम्भ में मेरी चेष्टा यह थी कि लोकप्रिय विषयवस्तु की रचनाओं को प्रकाशित करवाऊँ ताकि प्रकाशकों और पाठकों का विश्वास जीत सकूँ। मुझे भरोसा था कि मालकौंस वैसी किताब है, जो उत्कृष्टता के मानकों का निर्वाह करते हुए अधिकाधिक पाठकों तक पहुँचने में सक्षम होगी। हिंदी सिनेमा और सुगम संगीत से मेरा जो निजी रागात्मक सम्बंध है, उसकी भरपूर अभिव्यक्ति इस किताब में हुई है।
4.
माउथ ऑर्गन
हिन्द युग्म, 2019
इसकी लोकप्रियता ने मुझे चकित किया और नया आत्मविश्वास दिया। यह मेरी सबसे अधिक पढ़ी गई पुस्तक है। इसकी प्रतियाँ भी अन्य पुस्तकों से अधिक संख्या में बिकी हैं। हर वर्ग के पाठकों का दिल इसने जीता और महिलाओं, बच्चों तक भी पहुँचने में सफल रही। यह नैरेटिव प्रोज़ की पुस्तक थी और मेरा उस समय तक का सबसे सुंदर गद्य इसमें संजोया गया था। प्रकाशक ने इसे क़िस्सों की किताब कहकर पुकारा, अलबत्ता इसमें कथेतर भी कम नहीं था। इसलिए किताब के उपशीर्षक में मैंने कहानी और कहन के नानाविध आकारों की आज़माइश कहकर इसकी श्रेणी को और स्पष्ट करने का यत्न किया। किंतु क़िस्सों के रूप में इसकी ब्रांडिंग ने इसे एक अच्छी शुरुआत दिलाई और अपनी सुंदरता के चलते यह पाठकों के पास ठहर गई। माउथ ऑर्गन के बाद ही मुझे यह अनुभव हुआ कि कदाचित् मैं लेखन की दुनिया में अपना एक स्थान बनाने में कुछ सीमा तक सफल हो सकूँगा।
5.
सुनो बकुल
प्रतिश्रुति प्रकाशन, 2020
माउथ ऑर्गन की सफलता के रथ पर सवार होकर बकुल आई थी और इसने अपना स्वयं का एक प्रशंसक-वर्ग बनाया। साल 2020 की पहली जनवरी को इसकी घोषणा हुई और तदनन्तर दिल्ली पुस्तक मेले में इसका अनौपचारिक विमोचन हुआ। इसकी श्रेणी रम्य-रचना और ललित-लेख है। इसकी भाषा में तत्सम की छटा है। अपने आशयों में यह भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं को पुकारती है। मैं अपनी किसी और पुस्तक में इतना भारतीय, सनातनी या हिंदू नहीं हुआ हूँ, जितना इसमें। अपनी रचनात्मक-यात्रा में उस प्रस्थान को अब पीछे छोड़ आया, इसलिए इसे किंचित दूरस्थता के साथ अब देखता हूँ। यह मेरी इकलौती ऐसी पुस्तक भी है, जो पुरस्कृत हुई है।
6.
दु:ख की दैनन्दिनी
लोकोदय प्रकाशन, 2020
दैनन्दिनी भी बकुल के साथ दिल्ली पुस्तक मेले में आने वाली थी किंतु किसी कारणवश इसके प्रकाशन में देरी हुई और यह उसके एक महीने बाद फ़रवरी में आई। इसमें संकलित कविताएँ 2018 के उत्तरार्द्ध और 2019 में पूर्वार्द्ध में लिखी गई थीं। गहरे अवसाद, विषाद, मृत्युबोध की अभिव्यक्ति इसमें हुई है। मैंने एकाधिक अवसर पर कहा है कि मेरी सभी पुस्तकों में यह मेरे हृदय के सबसे निकट है, और सदैव रहेगी। इसमें मेरी अंतरात्मा का एक अंश झलक आया है, जिसे मैं अन्यथा संसार से बड़ा छुपाए फिरता हूँ।

7.
गांधी की सुंदरता
हिन्द युग्म, 2020
सितम्बर 2019 में मैंने गांधी-साहित्य का अवगाहन आरम्भ किया और आगामी छह माह तक इसमें डूबा रहा। मैं गांधी-तत्व से आविष्ट हो चुका था। इन छह माह में पढ़ी-लिखी-सोची-जी गई हर विचार-वस्तु को संकलित, संयोजित करने से यह पुस्तक बनी है। मैंने स्वयं से यह अपेक्षा कभी नहीं की थी कि इसके जैसी कोई पुस्तक लिखूँगा, किंतु जब उस दिशा में प्रवेश किया तो एक पुख़्ता वस्तु ही रची- इसने मुझे संतोष दिया। इसे मैं लेखन के क्षेत्र में अपना सबसे महत्वपूर्ण कार्य मानता हूँ। इसने पाठकों के अंतर्मन को छुआ है और उन्हें उद्वेलित भी किया। आगे भी यह निरंतर पाठक पाती रहेगी, यह निश्चित है। वर्तमान कालखण्ड में हमारी सामूहिक-चेतना जिस दिशा में अग्रसर हो रही है, उसका रचनात्मक प्रतिकार यह पुस्तक अतीत के एक अनुकरणीय विग्रह के माध्यम से करती है। अपनी विषयवस्तु की गम्भीरता के बावजूद यह रचनात्मक-गद्य की पुस्तक है और पाठकों ने इसे अपना स्नेह देने में बिलकुल कोताही नहीं बरती है।
8.
बायस्कोप
यश पब्लिकेशंस, 2020
माउथ ऑर्गन नहीं होती तो बायस्कोप भी नहीं हो सकती थी। मुझे यह खटक रहा था कि माउथ ऑर्गन में अपने पाठकों से क़िस्सों का वायदा करने के बावजूद मैंने उन्हें भरपूर क़िस्से नहीं सुनाए। किंतु इससे मुझे यह भी सूझा कि मुझे छोटी कहानियाँ लिखने की भरसक कोशिशें अवश्य करनी चाहिए और एक पूरी पुस्तक ही क़िस्सों की तैयार करनी चाहिए। प्रेरणा के दो दौर (अगस्त 2019 और जून 2020) में बायस्कोप की अधिकतर कहानियाँ लिखी गईं। यह पुस्तक मेरे गृहनगर उज्जैन को समर्पित है। इसने धीमी शुरुआत की, किंतु धीरे-धीरे अपने पाठक पाए। कालान्तर में बायस्कोप में संकलित सामग्री से बिन्ज हिन्दी एप्प पर दो जिल्दें प्रकाशित हुईं, जिन्होंने मुझे कुछ और नए पाठक दिए। बायस्कोप भी अभी अपनी पूर्ण सम्भावनाओं को अर्जित नहीं कर सकी है। इसमें संकलित क़िस्से अपनी सरलता और मार्मिकता के कारण आने वाले समय में निरंतर पाठकों के मन तक पहुँचते रहेंगे, इसको लेकर- अलबत्ता- पूर्णतया आश्वस्त हूँ।
9.
धूप का पंख
लोकोदय प्रकाशन, 2021
इसके बाद मैंने कविताओं से संन्यास की घोषणा कर दी थी। मैंने कहा था कि धूप का पंख मेरी कविताओं की चौथी और अंतिम पुस्तक है। कदाचित् वह मेरी कविताओं की सबसे अच्छी और प्रतिनिधि पुस्तक भी है। किंतु गद्य-लेखन के प्रति अपनी निष्ठा के चलते मैंने उस दिशा में स्वयं को ख़र्चने से अब रोक लिया है। प्रकाशन के बाद से यह निरंतर विक्रय के लिए उपलब्ध नहीं रही है, इसलिए इसे भी अपनी अंडर-परफ़ॉर्मिंग पुस्तकों में से एक समझता हूँ। जबकि जानता हूँ कि इससे कहीं बेहतर की यह हक़दार है और कालान्तर में अपना स्थान अवश्य पाएगी।
10.
कल्पतरु
सर्जना (वाग्देवी-सर्जना) प्रकाशन, 2021
इन पंक्तियों के लेखक को उसके सुरुचिपूर्ण गद्य के लिए पहचाना जाता है। तब मैं कहूँ कि इस लेखक का सबसे सुंदर और रचनात्मक गद्य अगर किसी पुस्तक में संकलित हुआ है तो वह कल्पतरु है। यह छोटी-सी पुस्तक मुझे बहुत प्रिय है और अगर निजी रूप से अपनी कोई पुस्तक किसी को उपहार में देना चाहूँ तो वह यही होगी। यह सुंदर होने के साथ ही प्रगल्भ और प्रांजल भी है और इसमें प्रसाद-तत्व भी कम नहीं। यह शिल्पगत रूप से वैसी सम्पूर्ण कृति है, जो कहीं भी बेसुरी नहीं होती। कल्पतरु के प्रकाशन के कुछ ही दिनों बाद वाग्देवी प्रकाशन बंद हो गया था और कुछ समय यह अनुपलब्ध रही, जिससे मुझे बहुत त्रास हुआ, क्योंकि इस कृति पर मुझे अभिमान रहा है।
11.
दूसरी क़लम
रुख़ पब्लिकेशंस, 2021
विश्व-साहित्य पर एकाग्र यह पुस्तक अपनी दार्शनिक-गम्भीरता में मेरी दूसरी पुस्तकों की तुलना में अद्वितीय है। यह अध्यवसाय के एक लम्बे इतिहास और उद्यम का सुफल है। मैं इसके प्रति संकोच में था कि इस पुस्तक को भला कौन पढ़ेगा, किंतु यह अत्यंत सुरुचि से प्रकाशित हुई और पाठकों ने इसका जैसा स्वागत किया, उससे मुझे आश्चर्यमिश्रित संतोष हुआ। मेरी बहुतेरी अन्य पुस्तकों की भाँति यह भी वैसी है, जिसके बारे में मैंने संकोचवश अधिक चर्चा नहीं की और पाठकों से यह मन ही मन अपेक्षा लगाई है कि वे अपने तईं इसे खोज निकालेंगे। वैसा हुआ भी है। अभी तक यह पाठकों तक निरंतर पहुँच रही है और पढ़ी जा रही है। विशेषकर मराठीभाषी पाठकों ने इसे बहुत सराहा है। बकुल से सर्वथा विपरीत भावबोध की यह पुस्तक- क्योंकि उसमें देश था तो इसमें देशान्तर है- अपने बौद्धिक-प्रस्थान के कारण मुझे अपनी अंतरात्मा का घोषणा-पत्र मालूम होती है।
12.
अपनी रामरसोई
दिव्यांश पब्लिकेशंस, 2021
भोजनरति की इस पुस्तक का अपना स्वाद और ठाठ है। यह लेखक की रुचियों के एक और आयाम को रूपायित करने वाली है। अलबत्ता उस आयाम से लेखक, पाठक और संसार का नाभिनाल सम्बंध है, विशेषकर उनका जो भोजन-ग्रहण करने से पहले उसको नमन करते हैं, उससे एक सात्विक तरह का सम्बंध अपने भीतर परखते हैं। इस पुस्तक में अनेक लेख मिष्ठान्न पर हैं। जीवनचर्या के परिष्कार के लिए इन पंक्तियों के लेखक ने तो अब शर्करा का परित्याग कर दिया, किंतु इससे उन लेखों का माधुर्य कम नहीं होने पाया है।
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अभी तक यह 12 पुस्तकें प्रकाशित होकर पाठकों के हाथों में पहुँच चुकी हैं। 13वीं पुस्तक विश्व-सिनेमा पर एकाग्र होने वाली थी किंतु कतिपय कारणों से उसका प्रकाशन टल गया। इसलिए अब 13वीं पुस्तक स्त्री-पुरुष सम्बंधों पर होगी, जो प्रकाशन के लिए तैयार है। यह मेरी सबसे विचारोत्तेजक और किंचित विवादास्पद पुस्तक सिद्ध होगी- इसको लेकर पहले ही सचेत हूँ, किंतु विषय ही वैसा है। इसके अलावा भ्रमणरति की एक अन्य पुस्तक भी लगभग बनकर तैयार है। बाद उनके कदाचित् विश्व-सिनेमा और सत्यजित राय पर पुस्तक का अनुक्रम बने। किंतु सोलह पुस्तकों के प्रकाशन के बाद भी लेखक ने थककर रुकना नहीं है, यह तो स्पष्ट ही है, अतैव यात्रा चलती ही रहेगी… सविनय।

