शोक संदेश

पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेन्द्र सिंह के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग

मऊ। पूर्व अध्यक्ष जूनियर बार एसोसिएशन, मऊ एडवोकेट ऋषिकेश सिंह के पिता पूर्व ब्लाक प्रमुख परदहा एवं अपने समय के मूर्धन्य राजनीतिज्ञ राजेन्द्र सिंह (प्रमुख जी) का सोमवार को लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में निधन हो गया। उनके निधन से जनपद मऊ के राजनीति में आईं शून्यता को भरना असंभव सा है। उनके निधन पर राजनैतिक, सामाजिक, अधिवक्ताओं में शोक छा गया। उनके पैतृक आवास अहिलाद पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा रहा। लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े रहे। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव से गाजीपुर के लिए ले जाया जाएगा। जहां गंगा तट के किनारे उसका अंतिम संस्कार होगा।

सिविल कोर्ट सेन्ट्रल बार एसोसिएशन जनपद मऊ के महामंत्री अजय कुमार सिंह एडवोकेट के शब्दों में स्मृति शेष…

स्व: राजेन्द्र सिंह जी (प्रमुख जी) एक ऐसा शख्स, जब जनपद मऊ नहीं बना था, तब आजमगढ़ जनपद में, और बाद में जब जनपद मऊ अस्तित्व में आया तब जनपद मऊ में एक संघर्ष का पर्याय। बचपन से ही उनके संघर्षों कि कहानियां आम जनमानस में सदैव चर्चा का विषय बना रहता था। संघर्षपूर्ण जीवन का आधा से अधिक समय वामपंथ की विचारधारा से ओतप्रोत होकर, मजदूरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तो एक नया आयाम लिखने को व्याकुल थी, परदहा कताई मिल व स्वदेशी कताई मिल के गेट के सामने तो अक्सर उनको मजदूर आंदोलनों कि अगुवाई करते हुए देखा जा सकता था। मजदूर भी उन्हें अपना मसीहा मानते थे। उस समय में जब वे सड़को पर अपने दैनिक जरूरतों के लिए भी निकलते थे तो सैकड़ों की संख्या में उनके पीछे-पीछे मजदूर अपनी साइकिल लेकर पैदल ही चल पड़ता था। सामने से आने वाला हर गरीब मजलूम, रुककर अभिवादन करता था और पीछे हो जाता था। समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की असंख्य लड़ाइयां लड़ी, और उनके सहयोग से एक ऐसे शख्स के रूप में स्थापित हुए की, जनपद के अनेक राजनीतिक धुरंधरों को उनके दरवाजे पर सजदा करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। अनेकों बार पुलिस द्वारा लाठीचार्ज में चोटिल हुए, अस्पतालों में भर्ती हुए, अस्पताल के बेड पर लेट कर भी गरिबों और मजलूमों के प्रति उनकी पीड़ा और मन में कशिश, उनको महान् व्यक्ति के श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता था। परदहा ब्लाक के तो हर गांव में उनके प्रति निष्ठावान समर्थकों कि एक फौज, आज भी है। लगभग तीस सालों तक जिसको उन्होंने चाहा वहीं ब्लाक प्रमुख बना। जीवन के आखिरी छड़ तक कभी अकेले भोजन नहीं किए, उनके साथ बैठना, उनकी प्रेरणादायक बातें सुनकर उनको छोड़कर हटने का मन नहीं करता था। उनके चाहने वालो का अंतिम समय तक उनके अगल बगल घेरा बनाये रखना, उनको एक जननायक का दर्जा प्रदान करता था।
भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏

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