रचनाकार

पर्यावरण की सुरक्षा, सुनिये पेड़ पौधे क्या कह रहे है, किशोर धनावत के शब्दों में


उखाड़ा नहीं जड़ से,
काट दिया धड़ से।
परिवार बिखर गया,
अब कौन किधर गया।
जमाने से पोसता रहा,
साथ रहेंगे सोचता रहा।
ऐ मानव! लेकर आश्रय,
कर दिया हमारा ही क्षय।
नहीं कर पाओगे विकास,
भोगोगे सांसों का संत्रास।
जब फैलेगी महामारी,
तब याद आयेगी हमारी।
सुनो,
धरती ने फिर सम्हाल लिया,
प्यार से अपना निवाला दिया।
मेरे नवजात फिर आयेंगे,
क्या ऐसे ही गिर जायेंगे।
अब तो अपनी दुष्टता छोड़ो,
कुछ तो शिष्टता अपनाओ।
सुधारो अपने व्यवहार को,
थोड़ी सी उत्कृष्टता अपनाओ।
अच्छा तुम जानो तुम्हारा काम,
हमें यहीं रहना है हमारा धाम।
किशोर कुमार धनावत,
रायपुर , १४-७-२०२१

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