खास-मेहमान

जिंदगी के 45 वर्ष समर्पित कर दिए सड़क पर वाहन दौड़ाते-दौड़ाते

(फतेह बहादुर गुप्त)
रतनपुरा/ मऊ। अपने फक्कड़ स्वभाव और अलमस्ती के आलम में जिंदगी गुजारने वाले रतनपुरा कस्बा निवासी सर्वजीत सिंह स्वभाव से अत्यंत ही विनम्र और सहज इंसान हैं। सड़कों पर 45 वर्ष तक वाहनों को दौड़ाने के दौरान कभी भी इनके हाथों दुर्घटना का कलंक नहीं लगा। हालांकि गाड़ियां इनके हाथों अनियंत्रित हुई ,परंतु किसी जान माल का नुकसान नहीं हुआ।
वर्ष 1977 में इनका मन मस्तिष्क सड़कों पर वाहन चलाने का इरादा बना, तो इन्होंने ड्राइवरी लाइन में घुसने का इरा मन बना लिया। और वे ट्रक चलाने के इरादे से पश्चिम बंगाल रवाना हो गए, और वहां अपने ट्रक चालक मित्रों के बीच में रह करके इन्होंने 35 वर्षों तक कोलकाता के विभिन्न इलाकों में ट्रक दौड़ाते रहे। ट्रक के बेहद संजीदा ड्राइवर माने जाते हैं ।जिसकी वजह से वह अपने काम को बेहतरीन ढंग से अंजाम देते रहे। जिसकी वजह से इनके जीवन में ट्रकचालकी के दौरान कोई समस्या नहीं आई। लेकिन 35 वर्षों तक पश्चिम बंगाल में रहकर के इन्होंने ट्रक चालक का जो कार्य किया, तो वहां की आबोहवा से अपने को अलग नहीं कर सके । यही वजह है कि कोलकाता की सड़कों पर ट्रक दौड़ाने के दौरान अपने ट्रक चालक मित्रों के संगत में पड़कर के इन्होंने मदिरा को भी मित्र बना लिया। जिसका आज भी सेवन करते रहते हैं।
35 वर्षों तक कोलकाता के विभिन्न गलियों और सड़कों में पर ट्रक चलाते हुए जब इनका मन ऊब गया ,और घर की याद आने लगी तो वे कोलकाता से रतनपुरा के लिए रवाना हो गए ,और इन्होंने अपना खुद का एक जीप खरीदा। और उसी से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने लगे। हालांकि ट्रक चालन के दौरान यह अपने आप को जहां मजा हुआ चालक समझते थे ,वहीं दूसरी तरफ जब उन्होंने जीप का चालन का कार्य शुरू किया तो मन में छोटी गाड़ी चलाने का कसक रहती थी। परंतु अपने फक्कड़ और अलमस्ती के स्वभाव के चलते इन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं आई । बाद में उन्होंने अपने जीप को जर्जर हालत में हो जाने की वजह से उसे कबाड़ में बेच दिया। अब दूसरे वाहन स्वामी का जीप चलाते हैं ,और मस्त रहते हैं। चालक सर्वजीत सिंह के स्वभाव में अत्यंत ही मधुरता और दयालुता भी भरी रहती है ।यह किसी गरीब और कमजोर को सड़क पर घूमते देख कर के उसे चाय जरूर पिलाते हैं। कोई घायल कुत्ता सड़क पर पड़ा हुआ है, तो उसको ही मरहम पट्टी स्वयं अपने हाथों से करते हैं। यह उनकी खासियत है ।जहां रहते हैं, वहां अपनी व्यवहार कुशलता के चलते अपनी खूबियों का साम्राज्य बना डालते हैं। मौजूदा समय में वे गाड़ी चलाते समय मदिरा का सेवन नहीं करते हैं। यह उनमें बदलाव आया है।

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