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शहीदे आज़म भगत सिंह के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में विचार गोष्ठी का आयोजन

मऊ। शहीदे आज़म भगत सिंह के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ भुजौटी-मऊ परिसर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता राम अवतार सिंह एवं संचालन जयप्रकाश धूमकेतु ने किया। शुरुआत करते हुए श्री सत्य प्रकाश सिंह एडवोकेट ने कहा कि भगत सिंह की जिंदगी पर सबसे अधिक प्रभाव उनके चाचा अजित सिंह की 1905 की ‘‘पगड़ी सम्भाल जट्टा’’ किसान आंदोलन का पड़ा बाद में 16 वर्ष की आयु में करतार सराभा अंग्रेजों ने फांसी दे दी। इन दोनों घटनाओं का प्रभाव ही भगत सिंह को शहीदे आजम भगत सिंह तक पहुंचाता है।
क्रालोस के साथी रामजी सिंह का कहना था कि भगत सिंह की सपनों का भारत बनाने के लिए फासीवाद की खोल ओढ़े नव साम्राज्यवाद से लड़ने के लिए जन गोलबंदी करनी होगी। जिसके लिए भगत सिंह को प्रतीक बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
नौजवान सभा के अनुरुद्ध ने कहा कि समाज के भीतर खासकर युवा पीढ़ी ने भगत सिंह के विचारों को पहुंचाने की जरूरत है। किसान संग्राम समिति के रामू प्रसाद ने दिल्ली से लौटने के बाद का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आज किसानों के सवाल पर भगत सिंह सबसे बड़ा सिंबल बन चुके हैं। हमें इस दौर में भगत सिंह को अपना आदर्श मानते हुए किसान मजदूर नौजवानों के बीच जाना होगा।
मरछू राम प्रजापति ने कहा कि निजीकरण की चल रही आंधी में भगत सिंह के विचार हमें ताकत देते हैं साथ ही हमें इस दौर में अंबेडकर को भी साथ-साथ रखना होगा। श्रीरामचंद्र राम सेवानिवृत्त एसडीओ ने कहा कि भगत सिंह और अंबेडकर के विचार ही हमें आने वाले समय में रास्ता दिखाएंगे। सरोज सिंह ने गीत के माध्यम से अपना विचार रखा। बृकेश ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि निजीकरण के दौर में बेरोजगारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है हमें नौजवानों के बीच भगत सिंह के विचारों को ले जाने की जरूरत है।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मऊ इप्टा के अध्यक्ष कामरेड रामअवतार सिंह ने कहा इस संकट के दौर में भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता बढ़ गयी है। भगत सिंह को मानने वाले विभिन्न संगठनों का एक फेडरेशन बनना चाहिए ताकि समाज के सवालों से संघर्ष तेज किया जा सके।
गोष्ठी में कुमारी विद्या मौर्या, रामसूरत, पिंटू, संजय राजभर, जीतेंद्र, अतुल सिंह, विरेंद्र कुमार शमशुल हक चौधरी आदि ने भगत सिंह को याद किया।
-बसन्त कुमार

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