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तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में नार्वे, चीन व नेपाल के विद्वानों का होगा व्याख्यान

■ डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ एवं हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 13 से 15 मार्च 2021 को आयोजन

मऊ। डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ एवं हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 13 से 15 मार्च 2021 तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है इस संगोष्ठी में नार्वे से चीन से और नेपाल से विद्वानों के व्याख्यान आयोजित किए गए हैं कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में हिंदुस्तानी अकैडमी प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ उदय प्रताप सिंह जी होंगे विशिष्ट अतिथि के रूप में छपरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सिद्धार्थ शंकर रहेंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार मिश्र करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान पर 3 दिन तक चलेगी हम सभी जानते हैं कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिंदी भाषा के उत्थान के लिए अथक परिश्रम किए थे उन्होंने साहित्य की भाषा के रूप में खड़ी बोली हिंदी के प्रयोग का आग्रह किया था क्योंकि इसके पूर्व में गद्य में तो खड़ी बोली हिंदी का इस्तेमाल होता था लेकिन काव्य की भाषा के रूप में ब्रज भाषा का ही प्रयोग किया जाता था आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी न केवल भाषा के लिए काम किया अपितु साहित्य में भी नए-नए छंद और रूपों के प्रयोग के पक्षधर थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के संपादन के दौरान हिंदी भाषा में ज्ञान की विभिन्न विधाओं को अभिव्यक्ति प्रदान की थी उन्होंने हिंदी में संपत्ति शास्त्र नाम की महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना सृष्टि के माध्यम से की इसके अतिरिक्त पुरातत्व एवं इतिहास के ऊपर अनेक हमें ग्रंथों का प्रण किया आचार्य द्विवेदी हिंदी में विज्ञान लेखन के पक्षधर थे और उन्होंने विज्ञान लेखन पर हिंदी में पर्याप्त काम किया है इसके साथ ही सरस्वती पत्रिका के संपादक के रूप में एक कुशल पत्रकार का उनका व्यक्तित्व हमारे सामने उपस्थित उपस्थित होता है इस तरह से महावीर सा द्विवेदी बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे जो तत्कालीन समय में समाज उसके इतिहास उसके भूगोल और विज्ञान तथा अर्थशास्त्र के चिंतन को लेकर के गंभीर रहे ऐसे महामंत्री के ऊपर डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ में हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के सहयोग से एक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 13 मार्च से 15 मार्च तक आयोजित की गई है जिसमें देश के विभिन्न कोणों से विद्वान आएंगे और अपने वक्तव्य से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के रचना कर्म पर प्रकाश डालेंगे।

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