शब्द मसीहा की कहानी : गरीब
( शब्द मसीहा केदारनाथ )

रेड लाइट होते ही उसकी तरफ आठ-नौ साल का एक बच्चा बढ़ा और उसमें अपना हाथ फैला दिया।
“पता नहीं कैसे-कैसे मां बाप हैं, बच्चों को पैदा करके छोड़ देते हैं भीख मांगने के लिए।” वह अपनी मोटरसाइकिल पर बैठे-बैठे बड़बड़ाया । लेकिन बच्चे की आंखों की चमक देखकर न जाने उसे क्या हुआ कि उसने अपनी पैंट की जेब से पर्स निकाला और उसके हाथ में एक दस रुपये का नोट रख दिया।
सिग्नल ग्रीन हो गया था और उसने तेजी से अपनी गाड़ी को आगे बढ़ा दिया। जल्दबाजी में उसका पर्स पूरी तरह से जेब में नहीं फंसा था और जैसे ही झटका लगा पर्स सड़क पर गिर गया।
उस लड़के की नजर पर्स पर पड़ी तो उस ने पर्स को उठा लिया। लड़के को लग रहा था कि वह आदमी कहीं दूर न निकल जाए। उसने एक गाड़ी के सामने अपने आप को खड़ा कर दिया।
“अबे मरेगा क्या? आगे से हट मुझे जल्दी जाना है।” कार के मालिक ने हॉर्न बजाते हुए कहा।
“साहब! एक मोटरसाइकिल वाले ने मुझे दस रुपये दिए थे और उसका पर्स गिर गया है। आप मुझे अगली रेड लाइट तक छोड़ दो। यह पैसे उसके हैं, इन पैसों पर मेरा कोई हक नहीं है।” लड़के ने कहा।
कार वाले ने उसे दूसरी तरफ से बैठ जाने का इशारा किया। लड़का गाड़ी में बैठ गया। गाड़ी तेजी से अगली रेड लाइट के पास जाकर रुकी । लड़के ने मोटरसाइकिल सवार की टी-शर्ट से उसे पहचान लिया था। वह गाड़ी से उतरने ही वाला था कि सिग्नल फिर से ग्रीन हो गया था। आगे से गाड़ियां फिर चलने लगी थीं।
“साहब! उस लाल टी-शर्ट मोटरसाइकिल वाले का है पर्स। उसके पास ले जाकर गाड़ी रोकिए।” लड़के ने पीछे से कहा।
मोटरसाइकिल सवार बड़ी तेजी से मोटरसाइकिल चला रहा था। कार के मालिक ने अपनी गाड़ी को और तेज चलाया और अगली रेड लाइट पर उस ने मोटरसाइकिल को पीछे छोड़ दिया। जैसे ही मोटरसाइकिल रेड लाइट पर पहुंची तो वह भिखारी लड़का गाड़ी से उतर गया और मोटरसाइकिल सवार के पास पहुंचा।
“ओ साहब! इतनी तेज मोटरसाइकिल क्यों चलाते हो? आपको पकड़ना बहुत मुश्किल था। उन कार वाले साहब ने मुझे आप तक पहुंचाया।” लड़के ने कार की तरफ इशारा करते हुए कहा।
“अबे! तुझे दस रुपये दे तो दिए, फिर मेरा पीछा क्यों कर रहा है?” मोटरसाइकिल सवार ने पूछा।
“साहब! हराम का पैसा नहीं रखता। अपनी मां के लिए पैसा मांगता हूं। आपका पर्स वहां पर गिर गया था। मैं आपका पर्स देने के लिए आया हूं। अब मुझे यहां से चलकर पैदल जाना पड़ेगा।” और उसने मोटरसाइकिल सवार को उसका पर्स थमा दिया।
मोटरसाइकिल सवार उस छोटे बच्चे को बड़ी ही मोहब्बत से देख रहा था।
“तुम अपनी मां के लिए भीख मांगते हो? तुम्हारे घर में और कोई नहीं है?” उसने लड़के से पूछा।
“मेरे पापा हैं। मगर उनका काम बंद हो गया है, और वो मुंबई से वापस नहीं आए हैं। मां की तबीयत खराब रहती है, इसलिए मैं ही अब अपने घर को संभालता हूं। पर मेरी मां कहती है कि अपने लिए किसी का हक नहीं मारना चाहिए। इसलिए मुझे आपका पर्स तो आप तक पहुंचाना ही था।” लड़के ने जवाब दिया।
“चलो मेरे पीछे बैठो ।” मोटरसाइकिल सवार ने लड़के से कहा और मोटरसाइकिल को रेड लाइट से यु टर्न कर लिया।
“तुम्हारा घर कहां है?”
“रेड लाइट से थोड़ा ही दूर है। हम किराए के घर में रहते हैं।”
“अपने घर का रास्ता बताओ मुझे।” मोटरसाइकिल सवार ने कहा और लड़के ने अपने घर का रास्ता बता दिया। जब घर पहुंचे तब एक औरत फोल्डिंग पलंग पर बेसुधी में पड़ी थी। मोटरसाइकिल वाला लड़का घर से बाहर निकला और उस लड़के को घर में रहने को कह गया।
कुछ देर बाद वह लड़का एक डॉक्टर के साथ लौट आया था। डॉक्टर ने उस लड़के की मां का मुआयना किया और दवाओं की पर्ची मोटरसाइकिल सवार को देते हुए बोला, “ऐसा लगता है कि सही से न खाने और डिप्रेशन के कारण इनकी ऐसी हालत है। इनको दवाओं के साथ साथ अच्छा खाने की जरूरत है।”
“जी डॉक्टर, मैं इनका ख्याल रखूंगा।” और उसके बाद वह मोटरसाइकिल सवार डॉक्टर को छोड़ने के लिए चला गया। लड़का अभी भी अपनी मां के पास बैठा हुआ था।
कुछ देर बाद मोटरसाइकिल सवार फिर से लौट आया था और उसके साथ एक रिक्शावाला भी था। रिक्शे में रसोई का सामान और बहुत सारे फल रखे हुए थे। उसने अपने हाथों से सारा सामान उठाकर घर में रख दिया था।
“देखो, यह तुम्हारी मां की दवा हैं। दवाओं की थैलियों पर सुबह, दोपहर और शाम लिखा हुआ है। इनको अच्छे से दवा देते रहना। इस पर्ची पर मैंने अपना नंबर लिख दिया है। अगर कोई भी जरूरत हो तो मुझे फोन कर देना।” मोटरसाइकिल सवार ने फिर से अपना पर्स निकाला और उस लड़के के हाथों में पाँच सौ के कई नोट रख दिये।
“यह सब पैसे तुम्हारे लिए हैं। अब तुम्हें रेड लाइट पर जाने की जरूरत नहीं है। तुम अभी बहुत छोटे हो, तुम्हें चोट भी लग सकती है। तुम नहीं समझ सकोगे कि मां की कीमत क्या होती है। माँ बहुत अनमोल होती है। दुनिया में कुछ भी खरीद सकते हैं, कुछ भी मांग सकते हैं लेकिन कोई मां को न तो मांग सकता है और न खरीद सकता है। तुम्हारी मां की ईमानदारी ने आज उसकी जिंदगी को बचा लिया है। तुम बहुत अच्छे बेटे हो।” ऐसा कहकर मोटरसाइकिल सवार ने उस बच्चे के बालों को सहलाया और घर से मुस्कुराते हुए बाहर जाने लगा।
“सुनो! क्या तुम्हारी माँ है? उन्हें मेरा नमस्ते कहना। तुम्हारी माँ भी बहुत अच्छी है।” लड़के ने मोटरसाइकिल सवार से कहा। इस बात को सुनकर उसकी आंखें गीली हो गई थीं। इस मामले में वह गरीब जो था।

