मऊ के ऐतिहासिक स्थल

मठिया बाबा का धाम, जहां झूठ बोलने से हांड काँपता है लोगों का

( ब्रह्म प्रकाश तिवारी )

मऊ। नगर क्षेत्र के छोटी सरजू तमसा के दाहिने किनारे पर बसा गाँव उमापुर कई मायने में विशिष्ट है, इस गाँव की विशिष्टता उस समय समय और भी बढ़ जाती है. जब गाँव के पूरबी हिस्से में स्थित परम पूज्य मठीया बाबा स्मृति में आता है और मन श्रद्धा, विश्वास आस्था से भर जाता है।
मठीया बाबा का धाम लगभग 7 बीघे वन भूमि पर स्थित है, कुछ वर्षों पूर्व तक यह धाम घने बन के रूप में था, जिसमे अकोल, चिलबिल महुआ, बरगद व अन्य जंगली प्रजाति के अनेकों वृक्ष थे,जो इस धाम को और भी अलौकिक छवि प्रदान था, किंतु अब बहुत से वृक्ष समाप्त हो गये है धाम के मध्य में स्थित पोखरा अपनी अलग छवि प्रदान करता है.

मठीया बाबा धाम आस पास के क्षेत्रों के साथ साथ दूर दराज़ के लोगो के अटूट आस्था का केन्द्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग आस्था और विश्वास के साथ मठीया बाबा का दर्शन पूजन करते है। सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। आज भी लोगोंं का धाम में  झूठ बोलने में हांड काँपता है।

जनश्रुतियों के अनुसार मठीया बाबा का नाम विश्वनाथ पुरी है,जो तीन तेजस्वी भाईओ में सबसे बड़े थे। श्री गोरखपुरी व लक्षमण भारती भी अत्यंत दिव्य संत थे। जिनकी समाधि स्थल क्रमस पास के आदेदीह व भीटी गाँव में स्थित है।
मठीया बाबा के चमत्कार की अनेक कथाएँ जनश्रुतियों में सुनने को रोज़ मिलती है, बाबा के दर्शन मात्र से असंभव कार्य भी संभव और सुगम हो जाते है। आज भी दैविक, दैहिक तथा भौतिक कष्टों को निवारण दर्शन मात्र से हो जाता है। मैं स्वंय तथा लोक कल्याण के लिए परम पूज्य बाबा विश्वनाथ के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ।

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