हे पत्रकार, तेरी ये औकात….!!!
दर्द से बिस्तर पर, कलम का सिपाही तड़प रहा है,
और देश को बदलने की गरज न जाने कहां सो रहा है।
पत्रकार शशि भूषण तिवारी जीवन और मृत्यु के बीच अस्पताल के बिस्तर पर जूझ रहे हैं। ना जाने कितने को अपने लेखन की बदौलत ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले एक पत्रकार का हालात इतनी बुरी होगी वह कभी न सोचा होगा, न कभी जाना होगा। उसने तो सिर्फ यही देखा होगा की मेरे जुनून और मेरे शौक से बेहतर इस धरती पर कोई और और समाज सेवा का दूसरा पहलू नहीं है। लेकिन यह कैसी समाज सेवा कि जो आज खुद मुफलिसी में है तो मदद के लिए बांट जोह रहा है। सरकारें भी खूब दावा करती हैं लेकिन उनकी असल सच्चाई क्या है वह यहां देखा और जाना जा सकता है।
ए. के. लारी के फेसबुक वाल से…
शायद बहुत से साथियों को नागवार लगे। औकात को चुनौती देना। पर मेरी नजर में ये ही सच है। और ये सच आइना तब दिखाता है जब आप किसी बैनर का हिस्सा न हो। ऐसा इसलिए कह रहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से वाराणसी में जिन्दगी की आखिरी जंग लड़ रहे है हम सभी के साथी शशिभूषण तिवारी। परिवार टूट चुका है।इलाज को पैसे नहीं है। हिन्दी अखबारों में नंबर वन कहे जाने वाले समाचार पत्र का कुछ वर्ष पहले तक हिस्सा रहे। पर प्रबंधन से हक और अधिकार को लेकर टकरा गये तो विदाई मिली। नौकरी जाने के साथ मानों मुसीबतें भी साथ जुड़ गयी। कच्ची गृहस्थी और साथ में मुखिया को कैंसर।
जितना बचा-खुचा था परिवार ने इलाज में लगा दिया। पर नतीजा सिफर। अब चिकित्सकों ने भी उम्मीद छोड़ दी है। मतलब अब सिर्फ भगवान का भरोसा। शशिभूषण फिलहाल वाराणसी के एपेक्स हास्पिटल के भवन नंबर 2 के तीसरी मंजिल के कक्ष नंबर 105 में भर्ती है। कुर्सी नहीं तो पूछने वाले भी कम। कुछ हाथ मदद को आगे बढ़े पर बीमारी के खर्च के आगे यह कुछ भी नहीं रहा।
#अपील…
अगर आप मदद करना चाहते हैं तो शशिभूषण तिवारी के फोन नंबर 09651944047 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
अथवा
#मदद…
यूनियन बैंक के खाता नंबर 356102010970809 में आईएफएससी कोड ubino 535613 के जरिए आर्थिक मदद भेज सकते हैं।

