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गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण सदी का सबसे लंबे समय तक का चंद्र ग्रहण

गाजीपुर। गुरु पूर्णिमा को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण के संबंध में विशेष जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई 2019 को है, यह भारत में दिखाई देगा। इसका समय 16 जुलाई की देर रात यानी रात 01:31 से सुबह 04:31 तक रहेगा। इस बार गुरु पूर्णिमा पर्व वाले दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। गुरु पूर्णिमा पर यह लगातार दूसरे साल चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्र ग्रहण था। क्योंकि ग्रहण से पहले सूतक लग जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा के कार्यक्रम सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। मध्य रात्रि को घटित होने वाला चंद्रग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण है तथा 21वीं सदी का सबसे देर तक चलने वाला चंद्रग्रहण है| सामान्यतः ग्रहण एक या डेढ़ घंटे की होती है, परन्तु यह चंद्रग्रहण 4 घंटे तक रहेगा।
उन्होंने बताया कि किसी भी ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारम्भ हो जाता है। सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए ज्यादा देर तक नही सोये और नही ज्यादा देर तक बैठना चाहिए। धार्मिक पुस्तक पढ़ना चाहिए। ज्यादा गुस्सा तथा नकारात्मक विचार से दूर रहे।

– चंद्र ग्रहण पर क्या करें…

श्री यति जी महाराज द्वारा बताया गया कि चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान नाम जप, स्नान, दान व हवन से मानव का कल्याण संभव है। उन्होने बताया कि साल भर श्रद्धालुओं द्वारा किए गए पूजन कार्य का फल ग्रहण के दौरान किए गए भगवान नाम जप, स्नान, दान व हवन से प्राप्त हो जाता है। चंद्र ग्रहण के असर से बचने के लिए गर्भवती स्त्रियों को अपने पास कुशा रखना चाहिए। कुशा का इतना अधिक महत्व है कि इसे हमें अपने घर में पूजन सामग्री अनाज वह तमाम महत्वपूर्ण स्थानों पर रखना चाहिए जिससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है। ग्रहण काल में मन तथा बुद्धि पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचने के लिए जप, ध्यानादि करना चाहिए।
– चंद्र ग्रहण पर क्या न करें
ग्रहणकाल में भोजन करना निषेध है उस समय घर में रखा हुआ खाना या पेय पदार्थ पुनः उपयोग करने लायक नहीं होता है। ग्रहण या सूतक से पहले ही यदि सभी भोज्य पदार्थ यथा दूध दही चटनी आचार आदि में कुश या तुलसी का पत्ता रख देते है तो यह भोजन दूषित नहीं होता है और आप पुनः इसको उपयोग में ला सकते है। सूतक एवं ग्रहण काल में झूठ, कपट आदि कुविचारों से परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में व्यक्ति को मूर्ति स्पर्श, नाख़ून काटना, बाल काटना अथवा कटवाना, निद्रा आदि कार्य नहीं करना चाहिए। इस समय बच्चे, वृद्ध,गर्भवती महिला, एवं रोगी को यथानुकूल खाना अथवा दवा लेने में कोई दोष नहीं लगता है। ग्रहण काल में शरीर, मन तथा बुद्धि में सामंजस्य बनाये रखना चाहिए मन-माने आचरण करने से मानसिक तथा बौद्धिक विकार के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी क्षय होता है। ग्रहणकाल में मन, वचन तथा कर्म से सावधान रहना चाहिए।

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