मिसाल-ए-मऊ

मऊ के छोटे से गांव का युवा कर रहा है..हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों के लिए काम

चौकिए मत ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है…बल्कि ये एक सच्ची कहानी है…उस युवा की जिसने अपनों सपनों को लाख मुश्किलों के बावजूद मरने नहीं दिया…उसने वो सच कर दिखाया जिसके बारे में वो अक्सर सोचता था.


हालांकि मऊ के चकमेहदी से हॉलीवुड और बॉलीवुड तक का सफर आसान नहीं था…राह में लाख परेशानियां आईं…लेकिन उम्मीदों की सीढ़ी से वो कभी नीचे नहीं उतरा…और जब मंजिल पर पहुंचा…तो मानो पूरा जहां उसके स्वागत के लिए तैयार खड़ी थी…हम बात राकेश पाल की कर रहे हैं…जो मऊ जिले के चकमेहदी का रहने वाला है…जिसके पिता का नाम मरछु पाल है…आम बच्चों की तरह राकेश भी स्कूल जाता था…उसने शुरूआती पढ़ाई चंद्रा पब्लिक स्कूल मऊ से की…फिर आगे उसने घर वालों के कहने पर बीएससी में एडमिशन ले लिया…लेकिन राकेश के सपने कुछ और थे…वो पढ़ाई से अलग अपनी नई दुनिया बनाना चाहता था…लेकिन सामजिक दबाव में उसने बीएससी की पढ़ाई जारी रखी…और फिर वही हुआ जिसका किसी को अंदाजा नहीं था…राकेश बीएससी में फेल हो गया…फिर क्या था वो रटी रटाई बातें…गांव-घर आस-पासके लोग और कुछ रिश्तेदारों को लगा कि राकेश अब जीवन में कुछ नहीं कर पाएगा…लेकिन ये सिर्फ राकेश को ही पता था कि दरअसल वो अब जिंदगी में वो कर पाएगा…जिसके बारे में वो हमेशा सोचता था…भले ही राकेश बीएससी की परीक्षा में फेल हो गया…लेकिन उसने जिंदगी की परीक्षा तभी पास कर ली थी….फिर क्या था राकेश अपने सपनों की उड़ान भरने इंदौर आ गया…राकेश का शुरू से मन कुछ अलग करने का था…लिहाजा अपनी रूचि को देखते हुए राकेश ने वहां एनिमेशन वीफैक्स फिल्म मेकिंग की कोर्स में एडमिशन ले लिया…

और सच जानिए की अभी राकेश का कोर्स पूरा भी नहीं हुआ था कि उसका प्लेसमेंट प्राइम चंडीगढ़ प्राइम फोकस प्राइवेट लिमिडेड हो गया…जबकि राकेश ने अभी तीन साल के कोर्स का पहला साल ही पूरा किया था…चंडीगढ़ में नौकरी करने के बाद राकेश पुने आ गया…जहां उसकी नौकरी डिलक्स इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिडेट में लग गई…राकेश का कारंवा यहीं नहीं रूका 2016 में वो हैदराबाद में रोटोमेकर इंडिया प्राइवेट लिमिडेट में सलेक्ट हुआ यहां कुछ दिनों तक काम करने के बाद अब राकेश लिजेंड 3D vfx Pvt LTD में है… राकेश ने बॉलीवुड और हॉलीवुड से जुडी कई फिल्मों में काम किया है.

आज राकेश अपनी प्रतिभा के दम पर ना सिर्फ मऊ का नाम रौशन कर रहा है…बल्कि उसके कला की कीमत सात समंदर पर भी सराही जा रही है…ये वही राकेश जिसको कुछ लोगों ने कहा था कि वो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा…राकेश की कहानी अब शायद उन लोगों के लिए सबक जरूर साबित होगी…जो बिना सोचे समझे उभरते सपनों को कुचलने का काम करते हैं…राकेश ने बताया कि उनके सपनों को पूरा करने में उनके घरवालों ने हमेशा उनका साथ दिया…खासकर उसके दादा जी ने हमेशा उसका मार्ग दर्शन किया…अपना मऊ की टीम राकेश को उनकी मेहनत और कामयाबी के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देती है…हमसे बात करते हुए राकेश ने हर युवा को यही संदेश दिया है कि अपने सपनों को कभी मरने ना दें…उसको हमेशा जिंदा रखें…उम्मीदों का दामन हमेशा थामें रखें…परिस्थियां जरूर बदलेंगी…मऊ की मिट्टी से जुडे ऐसे लोगों की कहानियां हम आपको यूं ही सुनाते रहेंगे..

 

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