डीएमयू सवारी गाड़ी निरस्त किए जाने से यात्री हलकान
(अशोक जायसवाल)
बिल्थरारोड / बलिया। वाराणसी – भटनी रेलवे रूट पर सप्ताह में 6 दिन भटनी से वाराणसी को जाने वाली डीएमयू सवारी गाड़ी को बिनाg किसी पूर्व सूचना के रविवार को निरस्त कर दिए जाने से यात्रियों को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा। इसके कारण इलाज को मऊ जाने वाले मरीजों, दिहाड़ी मजदूरों के अलावा उक्त ट्रेन से अपने निजी कामों से वाराणसी तक जाने वाले यात्रियों को काफी जिल्लत झेलनी पड़ी। जिससे उनमें काफी आक्रोश रहा। इसके परिचालन में विभाग द्वारा की जा रही अनियमितता व उपेक्षा यात्रियों के लिए अच्छा खासा सिर दर्द बन गया है। इसकी आए दिन लेटलतीफी व अनियमित परिचालन से रोगियों, दिहाड़ी मजदूरों, विद्यार्थियों व दैनिक यात्रियों समेत दूर दराज क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है।
उक्त ट्रेन की साप्ताहिक बंदी तो मानो यात्रियों के लिए विपत्ति का पहाड़ ही है। यह सवारी गाड़ी शनिवार की शाम को भी निरस्त कर दी गई। यही नहीं गुरुवार को भी इसे भटनी से ही 3 घंटे 35मिनट की देरी से चलाई गई। इससे सभी छोटे बड़े स्टेशनों पर इंतजार में बैठे यात्रियों को काफी अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा । इसके लेटलतीफी का आलम यह रहा कि मऊ स्टेशन पर सवा सात बजे की जगह 11बजे के बाद पहुंची। जिसके चलते सैकड़ों दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिलने के चलते बैरंग ही घर वापस लौटना पड़ा। इसका समय से परिचालन नहीं होने से इससे रोज पढने जाने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है । जहां तक इस गाड़ी के इंजन की बात करें तो वह भी आएदिन खराब होती रहती है। जिससे दूसरा इंजन मंगाकर इसे रवाना करना इसकी फितरत बन चुकी है। इस ट्रेन से अगर कोई चाहे वाराणसी पहुंच कर कोई दूसरी ट्रेन पकड़ कर आगे की यात्रा कर लें तो यह सोचना बेमानी ही होगी। इसके चक्कर में लोगों का दूसरी गाड़ियों से कराया गया आरक्षण भी बेकार चला जाता है। यात्रियों का कहना है कि इससे बढ़िया तो पूर्व में चलने वाली सवारी गाड़ी ही थी जिससे लोग समय पर गंतव्य तक पहुंच तो जाते थे। विभाग ने पैसेंजर ट्रेन की जगह डीएमयू चलाकर यात्रियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है। वह गाड़ी जहां रोजाना व समय से चलती थी वहीं डीएमयू की साप्ताहिक बंदी व असमय से चलना यात्रियों की परेशानी का सबब बना हुआ है। जिसको लेकर यात्रियों का आक्रोश दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। यदि स्थिति यही रही तो यह कभी भी विष्फोटक हो सकता है।

