मैं ट्विंकल हूं हर पापा की
अखिल “आनंद” यादव
मै हूं बेटी संसार की ,
मुझको है जरूरत प्यार की।
लेकिन कुछ दरिंदे जिंदे है,
जिनकी बारी संहार की ।।
मेरी उम्र थी गोंद में रोने की,
मां की आंचल में सोने की ।
लेकिन जिसने बर्बाद किया,
उसको क्या हक है जीने की ।।
मै भी निर्भया बन जाती ,
मेरी भी मौत से ठन जाती ।
लेकिन मै तो मासूम रही ,
जितनी क्षमता थी दर्द सही ।।
जो देश धर्म की बात करे,
बस शब्दों से ही मार करे।
अब तो उनकी ही बारी है,
सीने में खंजर पार करे ।।
मेरी अखिल विश्व से बिनती है ,
जितने भी देश की गिनती है ।
हर देश में ये कानून बने ,
हर चौक पर ऐसे दूष्ट जले ।

