जन्मदिन पर विशेष – एक रचनात्मक क्रांतिकारी झारखण्डे राय
(गुंजन राय)
अमिला/मऊ। क्रांतिकारी चेतना एवं व्यक्तित्व के धनी, चिंतक विचारक के साथ साथ प्रखर वक्ता, सम्पूर्ण जीवन देश की आजादी एवं उसके उत्थान में समर्पित गरीबों शोषितों एवं दलित वर्ग के विकास में सदैव तत्तपर मऊ जिले के उत्तरांचल में स्थित सरयू नदी के निकट बसी अमिला की धरती स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान क्रांतिकारी झारखण्डे राय को जन्म देकर धन्य हुई ।प्रतिष्ठित जमींदार परिवार में 10सितम्बर1914 को जन्में मात्र 6वर्ष की अल्प आयु में ही अंग्रेजी शासन के उत्पीड़न एवं दमन की प्रतीक अमृतसर के जलियांवाला बाग से शहीदो के रक्त से सनी खूनी मिट्टी जो आदर एवं श्रद्धा के साथ गॉव के सभी घरों में घुमाकर दिखाई जा रही थी वह बाल मन के मानस पटल पर पत्थर की लकीर बन गई जो उनके बाल मन में अंग्रेज विरोधी क्रांतिकारी चिंगारी उत्पन्न की जो जीवन के अंतिम समय तक बुझ न सकी ।1938में क्रांतिकारी दल का गठन कर तय कार्यक्रम के अनुसार पिपरीडीह रेलवे स्टेशन के निकट ट्रेन में जा रहा सरकारी खजाना लूटने में प्रमुख भूमिका निभाई ।18अक्टूबर1939को किसान सभा गाजीपुर में गिरफ्तार कर एक वर्ष के कारावास दण्ड के उपरांत पंडित अलगू राय शास्त्री के प्रयास से सात वर्ष का कठोर दंड भुगतने के बाद अपने गृह नगर को केंद्र बनाकर क्रन्तिकारी समाजवादी पार्टी का संगठन तैयार कर पूर्वी उत्तर प्रदेश में जमींदारों के उत्पीड़न एवं दमन शोषण के खिलाफ किसानों, शोषितों को संगठित कर खेत मालिकों के रूप में प्रत्यक्ष करने के लिये पुर्णतया समर्पित हो गए ।नवम्बर 1952में क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी का विलय कम्युनिस्ट पार्टी में होने के उपरांत जीवन के अंतिम समय तक अनेकों बार विधायक एवं सांसद रहते हुए समरस भाव से समाज एवं देश सेवा करते रहे। जीवन के अंतिम वर्षों में लकवा की बीमारी से ग्रस्त होने के कारण 20मार्च 1987को इस महान क्रन्तिकारी ने संसार से सदैव के लिये विदा हो लिया।उनकी राजनैतिक गतिविधियों एवं अतल स्पर्शी चरित्र पर कुछ पक्तियों में प्रकाश डालना सम्भव नहीं है ।


बहोत अच्छा लेख है, ऐसे लेख हमेशा समाज को आईना दिखाते हैं ।