खेल-खिलाड़ी

चैम्पियन, चेल्सी!

@ सुशोभित

चेल्सी की चैम्पियंस लीग विजय ने यूरोप को चकित कर दिया है! बीती रात खेले गए सनसनीख़ेज़ यूरोपियन फ़ाइनल में चेल्सी ने अपनी गति, ओज, बल और इच्छाशक्ति से पेप गोर्डिओला की यशस्वी मैनचेस्टर सिटी को निष्प्रभ कर दिया। फ़ुटबॉल में कहते हैं अटैक विन्स यू मैचेस बट डिफ़ेंट विन्स यू टाइटिल्स। बीती रात चेल्सी ने आला दर्ज़े का डिफ़ेंसिव खेल दिखाकर सबको अचरज में डाल दिया। पेप गोर्डिओला ने एक अटैकिंग यूनिट मैदान में उतारी थी, चेल्सी की रक्षापंक्ति ने उसका एंटीडोट प्रस्तुत किया। बार्सीलोना की अकादमी से सुशिक्षित पेप कहते हैं कि मेरा बस चले तो मैदान में ग्यारह मिडफ़ील्डर उतार दूँ, चेल्सी ने पेप को सबक़ सिखाया कि फ़ुटबॉल एक प्रॉपर डिफ़ेंसिव यूनिट, एक उम्दा सेंट्रल मिडफ़ील्डर और तेज़तर्रार विंगर्स के एकलय में खेलने का नाम है- गेंद को बेसबब इधर-उधर धकेलकर पज़ेशन अपने हाथ में रखने के दिन लद गए।

पेप गोर्डिओला ने आधुनिक-फ़ुटबॉल की शब्दावली में फ़्लाइंग फ़ुलबैक्स, फ़ॉल्स नाइन और कोहेसिव-मिडफ़ील्ड यूनिट के आशयों को प्रचलित किया है। लेकिन बीती रात चेल्सी के फ़ुलबैक्स ने पूरे समय सिटी के विंगर्स को अपनी जेब में रखा। फ़ुटबॉल के कुशल रणनीतिकार समझे जाने वाले पेप ने अटैकिंग फ़ॉर्मेशन की ग़रज़ से अपने सेंट्रल डिफ़ेंसिव मिडफ़ील्डर फ़र्नान्दीनियो को बेंच पर बैठा दिया। इससे उनका सितारा मिडफ़ील्डर केविन डी ब्रूयने दिशाहीन हो गया। उसे बैकलाइन से प्राप्त होने वाले सिगनल्स में गतिरोध उत्पन्न हो गया। इससे पूरी टीम ही अपनी लय और आकार गँवा बैठी। दूसरी तरफ़ चेल्सी के सेंट्रल डिफ़ेंसिव मिडफ़ील्डर एनगोलो कान्ते ने मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीता। उसने इतने दमखम वाला खेल दिखाया कि सहसा उसका नाम इस वर्ष के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉलर के बैलोन डी’ओर पुरस्कार के लिए सर्वमान्य माना जाने लगा है। एक ऐसे मैच में जहाँ एनगोलो कान्ते पिच में हर जगह था, पेप ने अपने लिन्चपिन को बेंच पर बैठा दिया- यह फ़ुटबॉल की महान टैक्टिकल भूलों में शुमार हो गया है। बाद इसके, सिटी की डिफ़ेंस लाइन को चेल्सी ने उधेड़ दिया। अगर उनके पास टीनो वेर्नर के बजाय एक प्रॉपर सेंटर फ़ॉरवर्ड होता तो वो तीन से चार गोल दाग़ सकते थे। चेल्सी सचमुच चैम्पियंस की तरह खेली।

लेकिन, स्वयं चेल्सी के धुर प्रशंसकों ने यह उम्मीद नहीं लगाई थी। चार महीने पहले जब क्लब लेजेंड फ्रैंक लैम्पर्ड को हेड कोच के पद से बर्ख़ास्त किया गया था, तब चेल्सी प्रीमियर लीग में नौवें नम्बर पर थी। जब थॉमस तुषेल ने कोच की ज़िम्मेदारी सम्भाली, तब कहा जा रहा था- उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है लीग-टेबल में टॉप फ़ोर में फ़िनिश करना। टॉप फ़ोर का मतलब होता है चैम्पियंस लीग के लिए क्वालिफ़ाई करना। तब किसने सोचा था कि चेल्सी ना केवल टॉप फ़ोर में फ़िनिश करेगी, बल्कि चैम्पियंस लीग भी जीत जाएगी? अगर भाग्य ने साथ दिया होता तो चेल्सी एफ़ए कप भी जीत सकती थी, उसने कप-फ़ाइनल खेला था। मुझे याद नहीं आता अपने हेड कोच को हटाने के बाद किसी और क्लब ने वैसा उलटफेर निकट-अतीत में किया हो, वरना तो बहुतेरे क्लब वैसी बर्ख़ास्तगी के बाद एक-आध सीज़न स्थिर होने में ही बिता देते हैं।

गए साल बायर्न म्यूनिख़ यूरोप की सर्वश्रेष्ठ टीम थी। उसने पेरिस सेंट जर्मेन के साथ चैम्पियंस लीग फ़ाइनल खेला था और पेरिस उस सीज़न की दूसरी सबसे अच्छी यूरोपियन टीम थी। थॉमस तुषेल तब उसके कोच थे। इंग्लैंड में लिवरपूल का पराभव आरम्भ हो चुका था और मैनचेस्टर सिटी को प्रीमियर लीग की सबसे अच्छी टीम बीते तीन-चार सालों से माना जा रहा है। रीयल मैड्रिड, बार्सीलोना और यूवेन्तस का बीते सालों में यूरोप में पराभव हुआ है, किंतु दूसरी टीमें उनकी जगह भर रही हैं। चेल्सी को यूरोप तो क्या लंदन की भी सर्वश्रेष्ठ टीम अभी एक साल पहले तक बहुतेरे नहीं मानते होंगे। चेल्सी और आर्सनल के बीच बीते सालों में हुए हेड-टु-हेड मुक़ाबले कांटे की टक्कर के रहे हैं। लंदन इज़ रेड या लंदन इज़ ब्लू के सवाल निरंतर पूछे जाते रहे, भले आर्सनल ने अपनी चमक बीते सालों में निरंतर खोई हो। किंतु अब आप निश्चय से कह सकते हैं कि लंदन इज़ ब्लू।

तीन सालों में दूसरी बार चैम्पियंस लीग ट्रॉफ़ी इंग्लैंड में लौटकर आई है। लंदन में वो एक दशक बाद लौटी। यह ला लीगा के पतन और प्रीमियर लीग की श्रेष्ठता का जयघोष भी है। कल खेल शुरू होने से पहले इस ऑल-इंग्लैंड मुक़ाबले को ऑइल-डार्बी कहा जा रहा था। कारण- दोनों ही टीमों में तेल-निर्यातक देशों का पैसा लगा है। लेकिन फ़ुटबॉल में तेल और तेल की धार के मुहावरे के दूसरे मायने होते हैं। वेल-ऑइल्ड-यूनिट करके भी एक चीज़ होती है। किसने सोचा था कि पेप गोर्डिओला के सामने चेल्सी की टीम मिडफ़ील्ड को बॉस करेगी और यूरोप की सबसे तेज़तर्रार आक्रामण पंक्तियों में से एक मैनचेस्टर सिटी को चेल्सी के गोलची को ज़ेहमत उठाने का कोई मौक़ा नहीं दिया जाएगा- लेकिन यह जेम्स, रूडीगर, चिलवेल, सिल्वा जैसे डिफ़ेंसरों का कमाल था। फ़ुटबॉल में एक उम्दा डिफ़ेंसिव खेल गोलों की झड़ी से कम दर्शनीय नहीं होता। ऊपरी तौर पर देखने वाले कह सकते हैं कि खेल का निर्णय 1-0 से हुआ यानी नब्बे मिनट में एक ही गोल दाग़ा गया, लेकिन गेम की इंटेंसिटी इतनी आला दर्जे की थी कि पूरे समय आप पलक नहीं झपक सकते थे। एक शानदार फ़ुटबॉल सीज़न का अंत एक उम्दा गेम से हुआ। चेल्सी मुबारक़बाद की हक़दार है।

पुनश्च : गार्डियन अख़बार ने चेल्सी के सेंट्रल मिडफ़ील्डर एनगोलो कान्ते के लिए फ़ॉल्स-फ़ोर शब्द का इस्तेमाल किया है। पेप गोर्डिओला ने बार्सीलोना में फ़ॉल्स-नाइन के विचार को लोकप्रिय बनाया था। फ़ुटबॉल में सेंटर फ़ॉरवर्ड नौ नम्बर की जर्सी पहनता है, जबकि चार नम्बर की जर्सी पहनने वाला खिलाड़ी सेंटर बैक होता है। पेप गोर्डिओला पर कटाक्ष करते हुए गार्डियन यह इशारा करना चाहता था कि आप पिच पर कान्ते से पार नहीं सकते हैं, वो फ़ॉरवर्ड रन लेगा, वो ट्रैक-बैक करेगा, वो टेकल और इंटरसेप्ट करेगा। ना वो बहुत सारे गोल दाग़ता है ना थोक में असिस्ट देता है, लेकिन खेल के सूत्र उसके हाथ में होते हैं। बार्सीलोना के सेंट्रल मिडफ़ील्डर सेर्ख़ियो बुस्केट्स के बारे में कहा जाता था- अगर आप खेल देखेंगे तो आपको बुस्केट्स कहीं दिखलाई नहीं देगा, लेकिन अगर आप बुस्केट्स को देखेंगे तो आपको पूरा खेल दिखलाई देगा। ठीक यही बात अब एनगोलो कान्ते के लिए कही जा सकती है। चेल्सी की ताजपोशी में इस छोटे क़द के, सरलमन, मुस्कराने वाले अफ्रीकी खिलाड़ी का केंद्रीय योगदान है।

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