आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषक तत्वों के पौधे दिलायेंगे कुपोषण से मुक्ति : DM
पोषण माह…
• बच्चों एवं गर्भवती को पोषक तत्वों से भरपूर आहार देने पर जोर
• आंगनबाड़ी केन्द्रों की पोषण वाटिका में लगाए जाएं सहजन, पपीता एवं पालक के पौधे
मऊ। पोषण माह जिलाधिकारी अमित सिंह बंशल के मुख्य एजेंडे में है जिसका उद्देश्य बच्चों को बौनेपन और कुपोषण की समस्या से उबारना और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक विकास से मजबूत बनाना। जिलाधिकारी के निर्देश दिया है कि जिले के सभी विभागीय, विद्यालयी समेत पंचायत भवनों में कुल 1871 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, वहां पर सहजन, पपीता सहित तमाम पोषक तत्वों की उपलब्धता वाले पौधे लगाए जायें और इनके फलों-पत्तियों समेत सभी भागों को मिड-डे मील में शामिल किया जाए। साथ ही किशोरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को इसके प्रयोग पर जोर दिया जाए।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) दुर्गेश कुमार ने बताया कि जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 1154, पंचायत भवनों में 206 और विभागीय 498, शहर में 13 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। यहाँ पोषण वाटिका पर निरंतर कार्य हो रहा है। इनमें सहजन, पपीता, पालक, आंवला, नीबू, लौकी आदि के पौधे लगाए जा रहे हैं। पोषण वाटिका में हरी-पत्तेदार सब्जियों जिनमें आयरन ज्यादा पाया जाता है, उस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों के मिड-डे मील को पोषक तत्वों से भरपूर बनाया जाएगा और कुपोषण की समस्या से मुक्ति दिलाई जाएगी।
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सिंह कम लम्बाई की समस्या के लिए प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम को प्रमुख कारण बताते हैं। वह कहते हैं कि शरीर के विकास में हार्मोन्स की बड़ी भूमिका होती है। हार्मोन मांस पेशियों और हड्डियों को बढ़ाते हैं जैसे दिमाग से हड्डी बढ़ाने के लिए हार्मोन का श्राव होता है तो सभी तत्व अपनी-अपनी भूमिका में लग जाते हैं। आयरन, मैग्नीशियम और जिंक तीनों उत्प्रेरक का काम करते हैं। वहीं विटामिन, कैल्शियम, फास्फोरस हड्डियां बढ़ाने की प्रक्रिया में सीधे शामिल होते हैं। इनके ही कारण हड्डियों में घनापन आता है। यह एक तरह से काफी कुछ वैसे ही काम करते हैं जैसे एक मकान बनाने में बालू और सीमेंट करते हैं। प्रोटीन से एमीनोएसिड निकलता है जो मांसपेशियों को बनाता है।
डॉ प्रवीण सिंह बताते हैं कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे सभी अभियान पोषण की कमी को पूरा करने के लिए हैं। एक सामान्य भोजन जिसमें दाल, रोटी, फल, सलाद और दूध होता है, उसे संतुलित आहार कहा जाता है। यह हर परिवार के भोजन में शामिल नहीं होता है। कमजोर वर्ग के लोग कभी रोटी और नमक या रोटी और प्याज से ही काम चला लेता है, जिससे उन परिवार के बच्चों में इन पोषक तत्वों की कमी रह जाती है और शरीर का विकास ठीक से नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि सहजन, पपीते, पालक में बहुत से पोषण तत्व पाए जाते हैं जिनको अपने आहार में शामिल का स्वस्थ रहा जा सकता है।
सहजन है बहुत ही गुणकारी नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के आयुष चिकित्सक डॉ संतोष चौरसिया ने बताया कि सहजन की पत्तियों में कैल्शियम और विटामिन-सी के अलावा प्रोटीन, पोटेशियम, आयरन, मैगनीशियम और विटामिन-बी कॉम्पलैक्स भी प्रचुर मात्रा में होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण सहजन को मेडिकल प्लांट भी कहा जाता है। इसके पत्तियों में भरपूर मात्रा में आयरन और कैल्शियम मौजूद होता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन के पौधे लगवाने का मुख्य उद्देश्य गर्भवती माताओं को इसके प्रयोग पर बल देना है। उन्हें प्रेरित किया जा रहा सहजन की सब्जी, सूप आदि का प्रयोग करने से उनका स्वास्थ्य तो उत्तम होगा ही जन्में बच्चे भी स्वस्थ होंगे। सहजन की उपरोक्त विशेषताओं के अतिरिक्त यह कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत है जो हड्डियों का प्रमुख तत्व होता है। बढ़ते बच्चे, वृद्ध, धात्री और गर्भवती को कैल्शियम संपन्न खुराक की आवश्यकता होती है। अतः इन सबमें सहजन बहुत कारगर है।
डॉ संतोष ने बताया कि पपीते में सबसे अच्छे पाचक एंजाइम होते हैं जो कि भोजन को पचाने और स्वांगीकरण में सहायक होते हैं। स्वांगीकरण का मतलब भोजन के पाचन के बाद उसे आंतों में मौजूद वाहिकाओं द्वारा अवशोषित किए जाने की प्रक्रिया। वहीं पालक और बथुआ आयरन से भरपूर होते हैं जो शरीर में खून की कमी की स्थिति में बेहद कारगर होते हैं। साथ ही इनमें अच्छा रफेज (खुरदरापन) होने से कब्ज में भी लाभ होता है।

