खास-मेहमान

सहजन से लड्डू-बर्फी बनाने के बाद अब पनीर भी होने लगा तैयार

■ सहजन को अपनाएं, कुपोषण भगाएं का गीता पाण्डे बुलंद कर रही नारा
■ पोषण माह में आंगनबाड़ियों द्वारा खूब रोपे जा रहें इसके पौधे

मऊ। सरकार द्वारा सितंबर माह को पोषण माह घोषित किया गया हैं। इस माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर भ्रमण कर बच्चों का वजन कर उनकी लम्बाई नाप रहीं हैं। ताकि, उनमें कुपोषण की पहचान की जा सकें। इस निमित्त पिछले साल पूर्व जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने भी कुपोषण भगाने हेतु कई प्राकृतिक तरीके अपनाने पर बल दिया था। उन्होंने विभिन्न प्रकार का व्यंजन तैयार करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता पांडेय को पुरस्कृत भी किया था। जिसके बाद कुपोषण भगाने के लिए सहजन के पौध लगाने व इसके पत्तियों व फलों का अधिक से अधिक सेवन करने का प्रचलन बढ़ गया। यहीं नहीं सहजन के पौधे केवल जनपद में ही नहीं बल्कि पूरे सूबे भर में लगाए जाने लगे। सहजन में मिलने वाली पौष्टिकता को देखते हुए बड़राव ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता पांडेय ने इसके पत्तियों से बर्फी व लड्डू भी बनाए थे। यहीं नहीं अब वे उनसे पनीर भी बनाने लगी हैं। उनका मानना हैं कि, अगर सभी लोग सहजन को अपनाए तो पूरे देश से कुपोषण नाम की बीमारी सदा के लिए खत्म हो जाएंगी।

शहर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी लगा रही सहजन के पौधे
पायनियर डिजिटल समाचार सेवा से चंद्रशेखर श्रीवास्तव की विशेष रिपोर्ट
मऊ। शहर परियोजना से जुड़ी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कुपोषण भगाने में अपनी महती भूमिका निभा रहीं हैं। सीडीपीओ राधेश्याम पाल के दिशानिर्देशन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं हर रोज घर-घर जाकर लोगों को पौष्टिक आहार के बारे में बता रहीं हैं। वहीं लोगों को सहजन, आंवला, पपीता के अलावा कोविड-19 से बचने हेतु भी जागरूक कर रहीं हैं।

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