रचनाकार

रे पंडित कितने हैं चालाक, देख कर होते बुरे हालात भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

(शब्द मसीहा केदारनाथ)

जम के शुरू हुआ व्यापार
चढ़े चूड़ी, चुनरी ओ हार
मुंडने लगे सभी नर नार
चढ़ने लगीं थाली पे थाली
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

किसने पढे थे उनके ग्रंथ
रचा कोरा कपटी प्रपंच
बोल के झूठ बन गए संत
मूर्ख झूमते दे रहे ताली
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

श्रद्धा बेची, भक्ति बेची
पोथी-पुराण की बोई खेती
कथापारायण का जमा धंधा
जन की जेबें कर दीं खाली
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

नई कथाएँ रोज रचेंगे
हवन यज्ञ के दाम बढ़ेंगे
चित्रों सहित चरित्र बिकेंगे
नव उद्योग की नींव डाली
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

मंदिर के निर्माण कराओ
भोजन पानी खूब छकाओ
सुपरहिट फॉर्मूला कमाई का
अब धन की बहेगी नाली
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली
समझो साथी खेल झमेला
सजा हुआ अज्ञान का ठेला
पकड़ो बांह विज्ञान की सब
शोषण की अब बांधो कांठी
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

उगने दो विश्वास का सूरज
न तुम अफवाहों में आओ
पूजा वूजा से न कुछ होगा
बात अक्ल की कह डाली
रे पंडित कितने हैं चालाक, देख कर होते बुरे हालात
भरने को तोंद पांडे ने अपनी, कोरोना माता रच डाली

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