कुछ जरूरी और बेसिक दस्तावेजों के मिलान के बिना आयकर रिटर्न बिल्कुल ना फाइल करें
( CA रत्नेश कुमार सिंह )
नया एसएफटी फार्मेट लागू हो चुका है जहाँ आपके बहुत सारे आपके फाइनेंशियल ट्रांन्जेक्शन जानकारी सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा अपने आप आपके पैन नंबर पर आयकर विभाग के पास कम्प्यूटरीकृत माध्यम से चली जायेगी और आपको आज का अनदेखा करना 2 साल बाद आयकर विभाग से नोटिस आने पर पता चलेगा।

दूसरी समस्या पहले इन ट्रांन्जेक्सन पर मैनुअल नजर रखी जाती थी जो मैनपावर की समस्या या बड़े व्यापारिक लेनदेनों पर ज्यादा फोकस करने की वजह से आम करदाता पर ध्यान नहीं जाता था परन्तु अब फैसलेश स्क्रूटनी लागू हो गयी है जहाँ आपके लेनदेन के विशिष्ट कम्प्यूटर साफ्टवेयर द्वारा क्रास-मिलान से ज्यादा से ज्यादा नोटिस आने की संभावना है जिसमें आप अपने शहर के लोकल लेवल की आफिस पर आप अपना पक्ष नहीं रख पायेंगे।
एक और बात किसी दूसरे व्यक्ति की राशि का ट्रांन्जेक्शन ओपनली अपने खाते से बिल्कुल ना करें जब तक बहुत आपात स्थिति ना हो अन्यथा इसके 2 नुकसान
1- यदि आपका या दूसरे व्यक्ति का किसी का नोटिस आ जाता है आयकर विभाग को आप लेनदेन का स्पष्ट लिखित प्रूफ नहीं उपलब्ध करा पायेंगे।
2- अगर आप किसी की राशि अपने खाते में लेते हैं और कैश या किसी अन्य तरीके से (उसके बताये किसी अन्य व्यक्ति को)उस राशि को वापस भी कर देते हैं और भगवान ना करें उसके साथ कुछ अनहोनी हो गयी तो आप उसके परिवार को भी इसका जबाब नहीं दे पायेंगे और उसका लीगल उत्तराधिकारी चाहें तो केस कर इस राशि को आपसे वसूल सकता है क्योकि मृत व्यक्ति को उक्त राशि वापसी का आपके पास कोई ठोस सबूत नहीं है।
अब आते हैं उन बेसिक दस्तावेजों पर जिनको मिलान करके ही आयकर रिटर्न दाखिल करें।
1- बैक पासबुक/स्टेटमेंट
2- 26 एस ( टीडीएस स्टेटमेंट)
3- लोन सेड्यूल
4- किये गये कैश खर्च के लिए कैश स्रोत (बैंक निकासी/लोन या अन्य) क्योंकि कैश लेनदेन पर मनाही है।
5- पुष्ट जमा राशि/दिये लोन/किये खर्च का स्रोत ( जिसे आय से अधिक मामला बोतले हैं अर्थात आमदनी अठन्नी खर्चा रूपैया) यहाँ ध्यान रहे स्रोत ना होने से कैश में 20000 से ऊपर लोन नही ले सकते और बैंक में इन्ट्री नहीं दिखेगी उस डेट पर।
6- बेची/खरीदी जमीन मकान का स्टैम्प मूल्याकन मूल्य और वास्तविक मूल्य का अन्तर यहाँ भी 20000 से ऊपर कैश मनही है।
7- किया गया डोनेशन स्लिप
8- निवेश प्रूफ
9 – ओपनिंग राशि इत्यादि इत्यादि।
- उपरोक्त केवल सामान्य करदाता जो व्यापार नही करते बल्कि वेतनभोगी या अन्य करदाता के लिए है ।
- बाकी व्यापार करने वाले भी इन दस्तावेजों के साथ जीएसटी रिटर्न , पार्टी लेजर , बहीखाता, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट इत्यादि इत्यादि रखें एवं अपने भरोशेमंद व जानकार कर सलाहकार के देखरेख में कोई भी रिटर्न डालें।

