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पावरलूम बुनकरों को किसानों की भांति फ्लैट रेट पर बिजली देने के शासनादेश में संसोधन न करने की बुनकरों ने रखी मांग

मऊ। उत्तर प्रदेश बुनकर फोरम के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल और समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अल्ताफ अंसारी के नेतृत्व में बुनकरों के प्रतिनिधिमण्डल ने जिलाधिकारी मऊ के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमण्डल में मुख्य रुप से कामरेड अनीस, ऐनुल मुजफ्फर, सैफ आलम, इम्तेयाज अहमद, रेयाज़ अहमद, इर्शाद अहमद, एकबाल मेम्बर, अमजद, ओजै़र इत्यादि मौजूद रहे।

बुनकर नेताओं ने पत्रक के माध्यम से क्या रखी मांग पढ़िए पूरी मांग पत्र…

सेवा में,
मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश सरकार
लखनऊ।

विषयः- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2006 में जारी पावरलूम बुनकरों को किसानों की भांति फ्लैट रेट पर बिजली देने के शासनादेश में सरकार द्वारा किये जा रहे संशोधन को रोके जाने के सम्बन्ध में।

महोदय,
सादर अवगत कराना है कि प्रदेश के बनुकरों के कल्याण हेतु किसानों की भांति पावरलूम बुनकरों को भी वर्ष 2006 से तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा सस्ते दर पर बिजली मुहैया कराये जाने हेतु बजट में प्राविधान कर शासनादेश संख्या 1969/24-पी-3-2006 दिनांक 14 जून 2006 द्वारा उत्तर प्रदेश के बुनकरों को भी फ्लैट रेट पर बिजली देने की व्यवस्था की गयी थी। प्रदेश में किसानों के बाद सब से अधिक लोगों के जीवन यापन का साधन बुनाई है। बुनकर पावरलूम के माध्यम से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, परन्तु भारी-भरकम बिलों का भुगतान करने में असमर्थ हैं। इसी सोच के परिप्रेक्ष्य में पावरलूम बुनकरों के कल्याण हेतु सब्सिडी आधारित बुनकर फ्लैट रेट टैरिफ लागू की गयी है, जिसके द्वारा बुनकरों को रु0 130.00 प्रति हार्स पावर प्रति माह (मशीनों की क्षमता के अनुसार) साथ में 10 प्रतिशत अतिरिक्त बत्ती पंखा का विद्युत विभाग में जमा करना होता है, शेष बिल की धनराशि सराकर द्वारा सब्सिडी के रुप में विद्युत विभाग को दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि उक्त पावरलूम बुनकर सब्सिडी पूर्व में सीधे सरकार द्वारा पावर कारपोरेशन को दी जाती थी, परन्तु वर्तमान में प्रश्नगत सब्सिडी हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के माध्यम से दी जाने लगी है।
आपको अवगत कराना है कि प्रदेश के अनेकों विद्युत वितरण खण्डों में विगत कई माह से पावरलूम बुनकरों के लोड बढ़ाने एवं नया कनेक्शन देने में टाल-मटोल की जा रही है।
महोदय, डी0बी0टी0 (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) के माध्यम से फ्लैट रेट के बुनकरों को सब्सिडी की धनराशि दिये जाने का मतलब यह होता है कि बुनकरों को बिल का पूरा भुगतान करना पड़ेगा और सब्सिडी की धनराशि उनके खाते में बाद में पहंुचेगी, जबकि प्रदेश का बुनकर इतना गरीब है कि विद्युत का बिल जमा करना उसके लिये संभव नहीं है। इसी वजह से बुनकरों में भय एवं असंतोष का माहौल बना हुआ है। इस प्रक्रिया से भ्रष्टाचार बढ़ेगा और बुनकरों का उत्पीड़न होगा।
इसलिये हम बुनकर आपसे सादर अनुरोध करते है कि वर्ष 2006 में लागू फ्लैट रेट के पासबुक की व्यवस्था को यथावत लागू रखते हुए सब्सिडी की धनराशि विद्युत विभाग के खाते में सीधे भेजे जाने की प्रक्रिया को ही बहाल रखा जाये। अगर बुनकरों के प्रति हार्स पावर के मूल्य 130.00 रुपये में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी जाये तो बुनकरों को कोई आपत्ति नहीं है। हथकरघा विभाग द्वारा सर्वे कराकर जिन लोगों ने फर्जी़ तौर से फ्लैट के पासबुक बना रखे हैं उसकी भी जांच कर के कार्रवाई करने की आवश्यकता के साथ-साथ विद्युत विभाग द्वारा बुनकरों के नाम पर जो मनगढ़ंत बिल बनाकर सरकार से मनमानी सब्सिडी वसूली जा रही है उसकी भी जांच करने की आवश्यकता है। बुनकर समाज आपका सदैव आभारी रहेगा।

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