रचनाकार

कविता : भारत प्यारा


डॉ अर्चना प्रकाश

लखनऊ

भारत प्यारा देश हमारा ,
दुनियां के न्यारों से न्यारा ।
दिल्ली दिल है भारत का,
केंद्र विदेशी आकर्षण का ।
लाल किला कालिंदी तीर ,
अभिज्ञान शाही जज्बे का ।
भव्य अतीत भविष्य वर्तमान,
देश की राजधानी ऊंची शान ।
झूमर बेजोड़ राजस्थान का,
अति मोहक वेश बांधनी का ।
शिखरों पर बने किले निराले ,
शौर्य पिटारे हल्दी घाटी के ।
देती नमक भर भर अंजुरी,
माटी संदली गुजरात की ।
कला अनोखी मीनाकारी की,
रणोत्सव मनभावन क्रीड़ाएँ ।
वाहे गुरु पंजाब खालसा ,
वीरो की माटी करे पुकार ।
मध्य प्रदेश भारत की सांस,
धर्म कर्म तप त्याग विशेष ।
देवभूमि उत्तराखंड पावन,
कर्म धर्म आस्था अर्पण का ।
वानप्रस्थ ऋषि कुंड अपार,
योग साधना परलोक सुधार ।
गया बोध बिहार गया भी ,
मृत्योपरांत भी जन्म सँवार ।
सब कौशल बंगाल समाया ,
बुद्धि विवेक भंडार ज्ञान का ।
भारत प्यारा देश हमारा ,
दुनियां के न्यारों से न्यारा ।

मो. नं. 9450264638

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