इस विपदा के समय राग द्वेष, गिले-शिकवे सब भूल कर एक साथ मिलकर एक दूजे की सहायता करनी चाहिए
(कृष्णा भिवानीवाला )
आज हम सभी जानते हैं, कि करोना जैसी भयंकर महामारी ने चारों और अपने पंख फैलाए हवा में उड़ रही है। पिछले वर्ष से अधिक आज इस महामारी की चपेट में असंख्य लोग काल का ग्रास बने, ऐसे में हमें धैर्य और साहस के साथ साथ संयम से काम करना चाहिए। दूसरी लहर इतनी भयानक होगी ये नहीं सोचा था और हम लापरवाह हो गये पीड़ितों की संख्या अधिक होने की वजह सरकार भी कुछ नहीं कर पा रही साथ ही आज का मानव ही मानव का दुश्मन बन प्राणवायु और दवाईयों की कालाबजारी से बाज नहीं आ रहा कुछ लोगों के लालच ने न जाने कितनों के घर उजाड़ दियें। इस विपदा के समय राग द्वेष, गिले-शिकवे सब भूल कर एक साथ मिलकर एक दूजे की सहायता करनी चाहिए। स्वच्छता का ध्यान रखें एक दूसरे से मिलते वक्त कम से कम तीन फीट की दूरी और चेहरे पर मास्क लगाएं साथ ही सरकार और डॉक्टरों के दियें निर्देश का पालन कर खूद भी इस महामारी की चपेट में आने से बचें औरो को भी सुरक्षित रखें ।
इसी संदर्भ में कहानी याद आ गयी जिसने भी लिखा वो मनोयोग है
जंगल में एक हिरणी प्रसव पीड़ा से पीड़ित थो और सुरक्षित जगह पर अपने बच्चें को जन्म देना चाहती थी, बादल भी गरज रहे साथ बिजली भी रह-रहकर चमक रही थी,अचानक उसकी नज़र शिकारी पर पड़ी वो तीर कमान पर चढ़ा वो हिरणी का वध करने जा रहा था तभी उसे शेर की गर्जनें की आवाज सुनी वो परेशान अपने परमपिता परमेश्वर को याद करने लगी अपने अजन्मे शिशु के लिए प्रार्थना करने लगी ऐसी विकट परिस्थिति वो क्या करें लेकिन बीना विचलित हुए ईश्वर का ध्यान किया तभी जोर से बिजली कड़की जिससे शिकारी का निशाना चूक गया और वो शेर को जा लगा जिस स्थान पर शिकारी खड़ा था वहां बिजली गिरी शिकारी भी मर गया और वहीं झाड़ियों के झुरमुट में उसनें बच्चें को जन्म दिया कहानी लिखने का मकसद सिर्फ यही है,कि हमें विकट से विकट परिस्थिति में भी धैर्य रखना चाहिए ।
अफवाहें न फैलाकर एक दूजे का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
क्योंकि राम से बड़ा राम का नाम।

