रचनाकार

शब्द मसीहा : ख़्वाब का साकार हो जाना

इश्क़ में ऐसी हड़बड़ी थी हमें, हमने मुर्दों को छोड़ दिया
हाँ, हमने भी इश्क किया है हुज़ूर, मगर एक ज़िन्दा लाश से

( शब्द मसीहा केदारनाथ )

जब हमने यह शे’र लिखा तो बहुत सारे लोग हमारी थोड़ी-सी बची कुची जान को नोंचने के लिए अपने नश्तर लेकर आ गए । वैसे भी आजकल एक नई बीमारी चली हुई है, जिसमें लोगों को सिखाया जाता है कि उनसे बड़ा और ऊंची जात का कोई नहीं है। मगर हमको तो लगता है कि हमारे मंटो से ऊंची जात का कोई नहीं है। अब आप पूछेंगे के भला भाई हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? आजकल इंसानियत भी सेल पर जो है….हा हा हा।

तो आपको बताए दे रहा हूँ कि इंसानियत की कोई जात नहीं होती है, कोई मजहब, या धर्म नहीं होता है, बल्कि इंसानियत अपने आप में सबसे बड़ा मजहब, सबसे बड़ी जात, और सबसे बड़ा धर्म होता है। मुझे तो हैरानी है कि आदमी का ब्लड प्रेशर नापने के लिए साइंसदानों ने कई तरह की मशीनें बना ली हैं। आदमी का बुखार, दिमाग का स्केन और न जाने क्या-क्या मापने के लिए आदमी ने बहुत सारी मशीनें बना ली हैं, लेकिन अभी भी कोई डॉक्टर, कोई साइंसदान ….. आदमी की इंसानियत नापने के लिए कोई मशीन नहीं बना सका है।

और जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है ?

आजकल एक मुहिम आदमी के खिलाफ खड़ी की गई है, और वो मुहिम ये है कि सवाल न पूछना, इस दुनिया में…. सबसे बड़ा गुनाह है। मौजूदा वक्त के खरीदे हुए समझदार लोग जिसे भी कह दें कि इसमें आदमीयत और इंसानियत है…. उसी के ऊपर आप को चलना है। भले उसमें रत्तीभर भी आदमीयत न मिले आपको । अगर आपने ऐसा नहीं किया, तो उन्हें पूरा हक मिला हुआ है कि वे आपको राक्षस प्रजाति का कहें, इस देश का दुश्मन कहें, इस देश की संस्कृति का भक्षक कहें …या फिर आप को देश के लिए खतरा और उनके धर्म का दुश्मन कहें । ये संवाद एकतरफा है, और ज़ोर-शोर से चल रहा है।

आप भी अपने लिए, अपने जाति के टैग को लेकर खुश हो सकते हैं, इस बात की आपको पूरी आजादी है। लेकिन सच बताना दोस्तों!….. जब आप आईने के सामने जाकर खड़े होते हैं, तो आपको अपनी शक्ल कितनी खूबसूरत लगती है?

“क्या कहा?”

मेरी बातें पूरी तरह से पागलपन का सबूत हैं। इंसानियत आजकल पागलपन का ही तो सबूत जो है। इज्जत वाले, ताकतवर, धर्मशील और न जाने क्या-क्या…. वे ही लोग हैं, जो आदमी को लाश में तब्दील कर देने को अपना धर्म समझते हैं। उनकी नजर में इश्क, मोहब्बत, प्यार, चाहत और प्रेम….. इस दुनिया का सबसे बड़ा गुनाह है। पर आप जानते हैं, हमारा इतिहास इस बात का गवाह है कि जिस आदमी ने दुनिया के अंदर सबसे ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतारा है ….. उसे सजदा किया गया है, उसके सामने अपने सिर झुका दिये हैं । आप उसे नेता, शूरवीर कहते आए हैं ….आपने अक्ल का इश्तेमाल नहीं किया, और उसे कभी क़ातिल नहीं कहा।

आप तो इतिहास को पूरी तरह से जानते हैं, आजकल तो …..वह क्या कहते हैं कि गूगल बाबा पर, सब कुछ मौजूद है, लेकिन जो कुछ गूगल के ऊपर मौजूद हैं उसे भी लोग बदल देने पर आमादा हैं अब गुग्गल जलाने पर भी सुगंध नहीं आती है।

आप जानते हैं कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ? मैं बेकार की बातें नहीं करता, मेरे पास बेकार की बातों के लिए समय ही नहीं होता है। लेकिन , अक्सर बेकार की बातें करके, मैं चारा फेंकता हूँ , ताकि कुछ बेकार के चारे के साथ ….. आप तक , इंसानियत के, भाईचारे के, दोस्ती के, मोहब्बत के कुछ पकवान पेश कर सकूँ । मैं इस बात से भी बहुत अच्छी तरह से वाकिफ़ हूँ कि बहुत सारे लोग मेरी इस मोहब्बत को जाहिलाना हरकत करार देते हैं। एक के साथ बांध देने को वे अच्छा समझते हैं, और मैं अच्छाई के साथ बंधा रहना चाहता हूँ।

दरअसल, बात यह है कि उनको लगता है कि मैं उनके नफरत भरे मिसाइलों के कनेक्टर निकालने का काम करता हूँ। मैं इस बात का बिल्कुल भी समर्थक नहीं हूँ, जो वे चाहते हैं कि “अंधकार कायम रहे”, मैं उन्हें बता देना चाहता हूँ कि मैं दीये जलाता रहूँगा, अपनी सांसें जलाकर।

सच बता रहा हूँ आपको कि बहुत सारे जतन करने से बाद, और अपनी उम्र के पचपन साल गंवा देने के बाद , जो कुछ भी पाया है मैंने, मैं उसे बस दीवानावार लुटा देना चाहता हूँ। लेकिन आप ये मत समझ लीजिएगा कि मैं कोई दीवाना हूँ। हाँ, अगर किसी चीज के लिए दीवाना हूँ, तो वह है….. प्यार और मोहब्बत के साथ जिंदगी।

क्या कहा?

हाँ , भले ही मेरी यह बात आपको कोई सपना लगे , लेकिन मैं अगर कुछ होना चाहता हूँ, तो बस….. ऐसा ही सपना होना चाहता हूँ। ताकि कुछ देर के लिए ही सही …. इस सपने को जी सकूँ। मोहब्बत में मरने का अपना ही मजा है ….मैं मजनू हूँ ….मगर जिस्म का नहीं …रूह का ।

मैं किसी धर्म से नफरत नहीं करता, नफरत फैलाने वाले हर धर्म से नफरत करनी चाहिए, मैं इस बात की पुरजोर सिफारिश करता हूँ ।

वे लोग जो आपको इस बात की धमकियां देते हैं कि वे आपकी जिंदगी को तबाह और बर्बाद कर सकते हैं, मैं आप से कहता हूँ कि उनकी आंखों में आंखें डाल कर आप उनसे सवाल पूछिए, कि क्या किसी को ज़िंदा कर सकते हो ? ऐसे मौत के सौदागरों से बचना बहुत जरूरी है मेरे दोस्त!

और आप देखना ऐसे लोग आपके इस सवाल से ही, आपसे दूर भाग जाएंगे। क्योंकि उन्हें मालूम है कि वह किसी को जिंदगी नहीं दे सकते। जो आदमी, लोगों की जिंदगी लेने में माहिर हो, इंसानियत के मामले में कंजूस हो, जिसे सिर्फ भविष्य के आईने में अपनी ही तस्वीर देखना पसंद हो, वह इंसान कभी किसी को जिंदगी नहीं दे सकता।

अगर कोई आपको जिंदगी देने की बात करता है, और अगर कोई आपको ज़िन्दगी दे सकता है, तो उस आदमी का आपकी मोहब्बत में पागलपन की हद तक गुजर जाने का जुनून होना लाजमी है।

यह साला मंटो, न जाने क्या करवाएगा? मैं खुद नहीं जानता कि ये रूह… कहां से इस दुनिया में मौजूद झूठ के आसमान के पार जाते हुए पहाड़ के अंदर से सच्चाई को खोजने की कोशिश कर रही है। शायद उसे मालूम नहीं कि सच्चाई , अच्छाई , इंसानियत आजकल ऑनलाइन सेल पर है। और अक्सर ऑनलाइन सेल में भेजे हुए पैकेट्स में पत्थर निकलते हैं।

हमारी सिविलाइजेशन ने पाषाण युग को देखा है, आज भी बहुत सारे लोग उसी पाषाण युग की स्मृतियों में खुशियों को तलाश रहे हैं। आज की दुनिया में आदमी की जान से पत्थर का महत्वपूर्ण हो जाना, यही तो बताता है। हम लोग पत्थरों के लिए आदमी को मार देना महत्वपूर्ण समझते हैं । लेकिन ये सब हमारी कोरी मूर्खता का प्रमाण है । मूर्ख लोग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, ऐसे लोगों की उपयोगिता किसी भी काल में कम नहीं हुई है, आप चाहें तो इतिहास को खंगाल कर देख सकते हैं, ऐसे बहुत सारे भक्त , आपको इतिहास की किताब में दर्ज़ मिल जाएंगे। और आपको इतिहास में ऐसे भी बहुत सारे लोग मिलेंगे, जिन की क़ब्र को आज भी लोग , जिंदा रूह मानते हैं।

मुर्दों का और जिंदा लोगों का यह संघर्ष हमेशा जारी रहेगा। ” ममी रिटर्न्स ” महज एक फिल्म नहीं है। हमारी अपनी जिंदगी को बहुत सारी ममियाँ प्रभावित कर रही हैं । इनको ममी भी नहीं बनाया गया है , ये लोग मरे भी नहीं हैं , मगर अतीत से ऐसे चिपके हुए हैं कि मेरा मंटो इन्हें ज़िन्दा स्वीकारने से मना करता है।

आजकल कैश नहीं रखता, ज़िंदा रहने के लिए लोग जेब काट सकते हैं, ज़िन्दगी की रक्षा बहुत महत्वपूर्ण है , लेकिन अजाने, अंजाने में किसी पर वार ठीक नहीं है, ज़िंदा रहने के लिए अगर मांग लिया जाय तो कोई छोटा नहीं होता, मगर आशिक जरूर हो जाता है, वैसे बुतपरस्त दुनिया से दिल हो जाने की कामना तो पत्थर में फूल उग आने के ख़्वाब का साकार हो जाना है।

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