रचनाकार

ये मेहनतकश बच्चे

(भास्कर राय )

ये मेहनतकश बच्चे
अकेलेपन में खुशियों
को तलाश करते…
पूरे दिन दौड़ते
थक कर चूर हो जाते
फिर भी मुस्कुराते
मन का सच्चे…
ये मेहनतकश बच्चे।

वसंत के पत्तों से झरे
पर उम्मीदों से भरे
माता-पिता
और भाई-बहन के
चहरों पर उगे..
सूखे दरख्तों पर
हरियाली भरने की चाह
लिए…बकटुट
हांफते-भागते.. ये बच्चे
हां… ये मेहनतकश बच्चे

मां की दवा
छोटू की फीस
छुटकी की फ्रॉक के लिए
खाली पेट
कृशकाय पिता के काम में
हाथ बटाते…
बचपन को गिरवी रख..
अनायास हो जाते है बड़े…
ये बच्चे
ये मेहनतकश बच्चे।

घर से निकलते
खाली हाथ…
खरीदने के लिए..
घर की तमाम खुशियां
शाम को देने के लिए
सबके चेहरों पर मुस्कुराहट
बार बार संवारते हैं..
बिखरते-फूटते सपनों को
उमर में कच्चे…
ये मेहनतकश बच्चे..।

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