अपना जिला

डीसीएसके पीजी कॉलेज एवं हिंदुस्तानी एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में छायावाद का शताब्दी वर्ष 2020 पर मऊ में संगोष्ठी सम्पन्न

मऊ। डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ एवं हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका विषय था छायावाद का शताब्दी वर्ष 2020 गोष्टी के मुख्य अतिथि डॉ उदय प्रताप सिंह अध्यक्ष हिंदुस्तानी अकैडमी प्रयागराज से तथा मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह थे कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार मिश्र ने किया। वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ राकेश सिंह श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय प्रयागराज के डॉ रमेश सिंह तथा जनता पीजी कॉलेज रानीपुर मऊ के रामप्रवेश सिंह थे कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ मुख्य अतिथि उदय प्रताप सिंह प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार मिश्र एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग डॉक्टर कंचन राय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं प्रजनन करके कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
वाणी वंदना विशाल पांडे ने किया और स्वागत वक्तव्य महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार मिश्र ने दिया अतिथियों के स्वागत के बाद हिंदी के वरिष्ठ गीतकार दयाशंकर तिवारी एवं भोजपुरी के सिर्फ गीतकार डॉ कमलेश कुमार राय को अंगवस्त्रम स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया सामाजिक जीवन में सक्रिय कार्यकर्ता आनंद प्रताप सिंह का भी अंगवस्त्रम स्मृति चिन्ह एवं सम्मान किया गया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि हमारा महाविद्यालय साहित्यिक गोष्ठियों के लिए हमेशा तत्पर रहता है और हिंदुस्तानी अकैडमी प्रयागराज की सौजन्य से जब भी कार्यक्रम की योजना बनती है तो पूरा महाविद्यालय उत्साह से राष्ट्रीय संगोष्ठी को कराने में तत्पर होता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तानी अकैडमी प्रयागराज के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह कहा कि चिन्मय भारत की अभिव्यक्ति हमें पूरे छायावादी काव्य में देखने को मिलती है छायावादी काव्य जीवन का काव्य है यह पलायन नहीं जीवन में कठिन परिश्रम संघर्ष और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला राष्ट्रवादी साहित्य है छायावाद जागरण का साहित्य है इसमें हम पाते हैं कि चाहे महादेवी वर्मा हो क्या सुमित्रानंदन पंत या जयशंकर प्रसाद हो अथवा सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सभी के साहित्य में शक्ति का संधान है यह शक्ति का समधन कमजोर का नहीं बलवान का आधार है।
छायावाद में शांति की तलाश है या शांति कमजोर हो कि नहीं अपितु बलशाली की शांति की तलाश है इसको आप निराला से लेकर के महादेवी में देख सकते हैं वास्तव में छायावाद भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्त का साहित्य है निराला की तुलसीदास कविता छायावाद की संस्कृति के अभिव्यक्ति का मील का पत्थर है निराला द्वारा रचित तुलसीदास कविता की बहुत ही कम चर्चा होती क्योंकि तुलसीदास कविता सेक्युलर वादियों के समक्ष चुनौती उत्पन्न करती है तुलसीदास कविता में भारतीय संस्कृति का आख्यान अभिव्यक्त हुआ है इस तरह से छायावादी कविता संस्कृति के पुनर्ख्यान का साहित्य है।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह संगोष्ठी को संबोधित करते हुए छायावाद की अभिव्यक्ति के विभिन्न पहलुओं पर अपना मत रख रहे थे उन्होंने बताया कि छायावाद सिर्फ काव्य का आंदोलन नहीं है अपितु इस काल के प्रमुख रचनाकारों ने महत्वपूर्ण गद्य साहित्य भी रचा है निराला प्रसाद महादेवी के गद्य साहित्य उच्च कोटि के साहित्य हैं महादेवी ने जहां संस्मरण और रेखाचित्र में मानक स्थापित किया वही निराला ने उपन्यास कहानी अनुवाद में महत्वपूर्ण काम किया प्रसाद तो नाटक के सम्राट ही कहे जाते हैं प्रसाद के नाटकों में भारतीय राष्ट्रवाद की अनुगूंज जगह जगह जगह दिखाई पड़ जाएगी चंद्रगुप्त नाटक तो राष्ट्रवाद शिखर ही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉक्टर राकेश सिंह ने बताया कि छायावाद का काव्य ऊर्जा का काव्य है शक्ति का काव्य है और आम जनता को जगाने वाला काव्य है निराला की राम की शक्ति पूजा न केवल शक्ति काव्य है बल्कि संस्कृति का भी काव्य है जिसमें राम के माध्यम से गुलाम भारत में आजादी की ज्योति जलाई गई है इसी तरह से सरोज स्मृति में निराला सरोज के चरित्र के माध्यम से समाज के बहुआयामी पक्ष को व्यक्त किया है। प्रयागराज से आए डॉ
रमेश सिंह ने छायावाद के विभिन्न आयामों की चर्चा करते हुए छायावादी साहित्य का विस्तृत विश्लेषण किया उन्होंने राम की शक्ति पूजा का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे राम आराधन का दृढ़ आराधना से उत्तर देने की बात करते हैं। जामवंत राम को कहते हैं की शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन। निराला गुलाम भारत में जागरण का संदेश देते हैं।
इस संगोष्ठी में प्रसिद्ध गीतकार दयाशंकर तिवारी और भोजपुरी के चर्चित गीतकार डॉ कमलेश राय ने अपनी कविता के माध्यम से गोष्ठी को सरस बनाया।
धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ कंचन राय ने किया और संचालन डॉ सर्वेश पांडे ने किया।
संगोष्ठी में डॉक्टर चंद्र प्रकाश राय डॉक्टर शकील अहमद डॉक्टर प्रदुम्न पासवान डॉ प्रशांत पांडे डॉक्टर योगेंद्र नाथ चौबे दस्तक डॉक्टर तपस्या डॉक्टर अखिलेश वर्मा, रवीश तिवारी पंकज तिवारी धीरज धर्मेंद्र दीपा आराधना प्रियंका सिंह उमेश यादव संदीप पाल सहित महाविद्यालय के तमाम छात्र छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *