कवि सम्मेलन : वंदे मातरम् हँसकर गाऊँ यही सिखाया माँ ने
◆जमुना उपाध्याय को हल्दीघाटी तथा अनुज अब्र हुए अंतर्नाद सम्मान से अलंकृत
मऊ। कोशिश के तत्वावधन में तमसा तट पर स्थित रामस्वरूप भारती इंटर कालेज में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में शीर्ष रचनाकार जमुना उपाध्याय को हल्दीघाटी एवं अनुज अब्र को अंतर्नाद सम्मान प्रदान लिया गया. दीप प्रज्जवलन और माल्यार्पण के उपरांत भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह ने स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान किया गया। इस दौरान देश भर से जुटे साहित्यकारों का देर रात तक काव्यपाठ होता रहा।
डा. शिवा त्रिपाठी सरस की वीणा वादिनि माँ वर दे के साथ कवि सम्मेलन का आगाज हुआ। युवा शायर महमूद आलम के तीखे चुभते शेरों के बाद वो ख़ंज़र सी हुसन वाली मेरी बाहों में रहती है, मैं अपने कत्ल का सामान अपने साथ रखता हूँ, से अनुराग सुशांत ने लेखन के नए तेवर से परिचित कराया. ओज की ओजस्विनी प्रियंका राय के काव्यपाठ भारत माँ का मान बढाऊं यही सिखाया माँ ने, वंदे मातरम हँसकर गाऊँ यही सिखाया माँ ने के साथ पूरा पांडाल करतल ध्वनि से भर गया। सुमन उपाध्याय ने गुलमोहर और माँ सुनाकर मंच को ऊँचाई प्रदान किया। हास्य कवि फजीहत गहमरी ने यदि लिप्त दुराचार में कोई मिले बाबा, ले जाके अस्पताल में बधिया कराईए सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया। दिल्ली से आईं कश्मीरा त्रिपाठी ने पंख बेशक नहीं हौसला ही सही, छू लूँ मैं आसमां ये दुआ कीजिए से मंच को नया परवाज़ दिया। जनार्दन पांडेय नाचीज़ ने फ़िर से दुश्मन है हमारी ताक में संकल्प श्रोत्रिय भूख लाचारी सुनाया। भारत भारत मेरा परिचय से मुक्तेश्वर पराशर ने ऊर्जा से भर दिया। डा. शिवा त्रिपाठी ने प्यार की रश्म दिल से निभाते चलो, नेह की धुन सदा गुनगुनाते चलो से माहौल को रुमानी एहसास से भर दिया। युवा साहित्यकार रुद्र प्रताप रामिश ने डर यह कैसा खोना क्या रे, हूँ मैं तुझमें होना क्या रे से जहां प्रेम और अध्यात्म सी ऊँचाई दिया वही महमसान गीत से पुरुषार्थ सिंह ने श्मशान के स्वरूप को निरूपित किया। सबको हैरत में डाल देती है, माँ मेरी सब संभाल लेती से अनुज अब्र ने गज़ल के नाजुक अहसास को छुआ। इसलिए मैं हाशिए पर हूँ, कुछ मेरी प्रतिबद्धताएं है से जमुना उपाध्याय के सदाबहार शेरों के बाद दयाशंकर तिवारी ने कुछ दरिंदों से हैं फूल सहमें हुए के साथ अध्यक्षीय काव्यपाठ किया। इस दौरान डा. गिरीशचंद मासूम, जतिन वाजपई, प्रतिभा श्री, स्मृति मिश्रा आदि ने काव्यपाठ किया. संचालन पुरुषार्थ सिंह ने किया।

