कविता !! निरीह !!
•••• कलमकार •••• चुन्नू लाल गुप्ता-मऊ ✍️ उदण्ड को दण्ड कहां वह फांद ज़ाल को जाते हैं अक्सर निरीह
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•••• कलमकार •••• चुन्नू लाल गुप्ता-मऊ ✍️ उदण्ड को दण्ड कहां वह फांद ज़ाल को जाते हैं अक्सर निरीह
Read More@ चुन्नू लाल गुप्ता… जलता हुआ चिराग़ हूँ, यूं तो ज़माने के लिए लोग जलाते हैं, अंधेरा मिटाने के लिए
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