मऊ में दूर-दराज के क्षेत्रों तक टीबी रोगियों को खोजने में मिल रही सफलता

■ दस्तक अभियान में अब तक खोजे गए टीबी के 22 नए मरीज

■ क्षय रोग को दस्तक अभियान से जोड़ने का मिला फायदा

मऊ। जिले के गांव-गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर दस्तक दे रही हैं। टीबी के सक्रिय मरीज, डेंगू, फाइलेरिया, मलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) आदि से ग्रसित मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार प्रदान किया जा रहा है । 25 जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान में लोगों को स्वच्छता, पोषण युक्त भोजन आदि की महत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आशा- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जिले के सभी गावों में घर-घर जाकर लक्षणों के आधार पर क्षय रोगियों को चिन्हित कर उन्हें जाँच के लिये स्वास्थ्य केन्द्रों पर भेज रही हैं।

जिले के नवागत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दूबे ने अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बैठक कर कार्यक्रमों की समीक्षा की और कहा कि कार्यकमों का लाभ जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र के आखिरी व्यक्ति को मिलना चाहिये।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एसपी अग्रवाल ने बताया कि साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त कराने का लक्ष्य है। पिछले संचालित किए गए दस्तक अभियान में भी टीबी रोगियों को खोजा गया था। वर्तमान में संचालित दस्तक अभियान के तहत अब तक 22 नए मरीज मिल चुके हैं । इन सभी नए रोगियों का निःशुल्क इलाज़ शुरु कर दिया गया है और सभी को रजिस्ट्रेशन के बाद निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह पौष्टिक आहार के लिये सीधे बैंक खाते में मिलेगा। उन्होने कहा कि दस्तक अभियान की वजह से दूर-दराज के क्षेत्रों तक टीबी रोगियों को खोजने में मदद मिल रही है। जबकि सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान (ए.सी.एफ.) के तहत पहले कुल आबादी का सिर्फ 10 प्रतिशत क्षेत्र ही कवर होता था।

जिला पब्लिक-प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी) जयदेश ने बताया कि इस अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लक्षणों के आधार पर टीबी रोगियों को चिन्हित किया जा रहा है। जांच के बाद पॉज़िटिव आने पर उन्हें उपचार पर रखा जा रहा है । इसके साथ ही निक्षय पोषण के इलाज के दौरान हर माह 500 रुपये दिये जा रहे हैं । इसके अलावा टीबी रोगियों को खोजने पर आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है । उन्होने बताया कि वर्तमान में जिले में 1872 टीबी रोगियों का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। इसमें 1361 मरीज राजकीय और 511 निजी क्षेत्र के शामिल हैं।

टीबी के लक्षण – दो सप्ताह या उससे अधिक समय से लगातार खाँसी का आना, खाँसी के साथ बलगम का आना, बलगम के साथ खून आना, बुखार आना (विशेष रूप से शाम को बढ़ने वाला), वजन का घटना, भूख कम लगना, सीने में दर्द आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। यदि इनमें से कोई भी लक्षण मिलता है तो आप स्वयं भी अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जाँच करा कर निःशुल्क इलाज का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान रहे कि टीबी के मरीज खांसते व छींकते समय अपने नाक व मुंह को कपडें से ढक कर रखें और इधर-उधर न थूकें जिससे यह अन्य लोगों में न फैले।

केस-1 – भैसाखरग निवासी हीरा (45) ने बताया कि मुझे हमेशा बुखार आता रहता था जिसके कारण एक दिन आशा बिंदु देवी के साथ कुछ लोग आये और स्वास्थ्य की जानकारी लेने लगे और उन्होंने मेरी जांच कराई तो टीबी पॉज़िटिव निकला। उसके बाद से विभाग के लोग समय-समय पर घर तक दवा पहुंचा देते हैं। इस तरह योजना का लाभ मिल रहा है ।   

केस-2 – बुढा़वर निवासी कामिनी राय (37) ने बताया कि पिछले दस्तक अभियान में आशा विद्यावती देवी टीम के साथ घर आईं। वह बहुत दिन से खांसी की समस्या से परेशान थी। आशा की मदद से बलगम की जाँच कराई। जांच में टीबी पॉज़िटिव निकला । इसके बाद विभाग के लोग नि:शुल्क दवा दे रहे है। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन भी कराया है।

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