आज ही के दिन सुभासपा से अलग हुए थे कटप्पा, ताक़त दिखाने की वर्षगाँठ
@ आनन्द कुमार…
o ग़ज़ब संयोग, एक साल हुए दूरी को, भाजपा व ओपी राजभर के प्रत्याशी दारा के खिलाफ आज अग्नि परीक्षा
मऊ। सुभासपा अध्यक्ष के करीबी व कार्यवाहक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी महेंद्र राजभर कटप्पा ने आज ही के दिन एक साल पहले शिक्षक दिवस के अवसर पर 05-09-2022 को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से और उसके सभी पदों से इस्तीफा देकर अलग हुए थे। उस समय उन्होंने इस्तीफा देने के कारणों में बताया था कि सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर अपने लड़ाई से भटक चुके हैं। बाद में महेंद्र राजभर ने अपने साथियों के साथ सुहलदेव स्वाभिमान पार्टी के नाम से अपना दल बना लिया ।
देखिए क्या ग़ज़ब संयोग है, कटप्पा को ओपी राजभर से दूरी बनाए हुए एक साल हुआ। भाजपा व ओपी राजभर के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान के खिलाफ आज ही उनका और उनके दल का अग्नि परीक्षा है। घोसी विधानसभा के उपचुनाव में कटप्पा के प्रत्याशी का पर्चा ख़ारिज हुआ, वे नाराज़ हुए, मजबूरी में सपा को समर्थन दिया, पूरे चुनाव में साइकिल के लिए वोट माँगा। आज महेंद्र राजभर का घोसी में सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह के लिए किए गए मेहनत का भाग्य ईवीएम में बंद हो जाएगा। एक साल पहले इस्तीफ़ा और आज मतदान दिवस, जब 08 सितंबर को ईवीएम का पिटारा खुलेगा तब ही पता चल पाएगा कि कटप्पा का मेहनत कितना रंग लाया।
उस समय प्रेस वार्ता के दौरान महेंद्र राजभर ने कहा था कि ओपी राजभर गलत दिशा में चले गए हैं जिससे आहत होकर हम लोग पार्टी छोड़ रहे हैं। महेंद्र राजभर ने बताया था कि हम सभी कार्यकर्ता 25 से 30 की संख्या में सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं। कहा कि नेताजी की जो लड़ाई थी वह लड़ाई आज परिवार पर ही आकर खड़ी हो गई है। नेता जी को कोई कार्यक्रम करना होता है तो तो कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर के वे कार्यक्रम सफल करा लेते हैं और जब कार्यक्रम सफल हो जाता है, और कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने की बारी आती है तो कोई भी फैसला कार्यकर्ताओं से पूछ कर नहीं लिया जाता है, बल्कि तीन लोग निर्णय ले लेते हैं। ओमप्रकाश राजभर जी तीन लोगों से पूछने के बाद जो भी फैसला लेना पड़ता है तो उनके एक बड़े भाई हैं वह उनसे पूछते हैं। पत्रकारों के सवाल पर बड़े भाई का जिक्र तो नहीं किया लेकिन जब एक पत्रकार ने पूछा कि आपका इशारा मुख्तार अंसारी की तरफ है तो महेंद्र राजभर ने कहा था कि आप पीछे जाइए नेताजी के बयान को सुनिए उसमें बड़े भाई का जिक्र आ जाएगा। उसके बाद जब पत्रकार ने पूछा कि क्या मुख्तार को कह रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यही मान लीजिए कि वे मुख्तार को ही बड़ा भाई कहते हैं! उनसे ही पूछ कर फैसला लेते हैं!

महेंद्र राजभर ने कहा था कि हम लोग पार्टी के स्थापना से लेकर अब तक नेताजी के साथ लगकर पार्टी के लिए काम करते रहे। 2017 में मेहनत कर कर नेता जी को सत्ता में पहुंचाया। लेकिन सत्ता में जाने के बाद नेताजी विचलित हो गए। हम कार्यकर्ताओं का मुख्तार अंसारी से कोई लेना देना नहीं है नेताजी उन्हें अपना बड़ा भाई मानते हैं वह उन्हें बड़ा भाई माने।
एक साल पहले जब पत्रकारों ने महेंद्र राजभर से सवाल किया था कि आप सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं और सर पर पार्टी का टोपी भी लगाए हैं तो महेंद्र राजभर ने कहा कि हम तो आप लोगों को इस्तीफा का कागज देने के बाद टोपी उतार उतार देते। लेकिन आप लोगों ने कहा बाद में पत्रक दिजिएगा पहले बात बताइए। इसलिए अब टोपी उतार रहे हैं और सभी कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी अपनी टोपी उतार कर रख दी।
महेंद्र राजभर से पत्रकारों का सवाल नया दल बनाएंगे या किसी दल में शामिल होंगे, के सवाल पर श्री राजभर ने कहा कि हम लोग शीघ्र ही आपस में तय करके कोई नया फैसला लेंगे। बस आप इतना यकीन करिए कि सुभासपा के 80 प्रतिशत लोग हमारे साथ होंगे। अब देखना होगा कि महेंद्र राजभर के इस दावे में कितनी सच्चाई थी ?

