पुण्य स्मरण

स्मृति विशेष : दोस्तों का दोस्त, दुश्मनों का दुश्मन अमर सिंह

श्रद्धांजलि, बीरेंद्र सिंह पत्रकार…

भारतीय राजनीति का एक ऐसा देदीप्यमान नक्षत्र जो राजनीतिक ब्योम में आज अस्त हो गया जिसके करवट बदलने से भारतीय राजनीति के बड़े से बड़े सूरमाओं के चूरे हिलेने लगते थे। यह वह शख्स स्वर्गीय हरिश्चंद्र सिंह का सुपुत्र जो बंगाल में पैदा हुए थे। विभिन्न भाषाओं में दक्ष अमर सिंह अंग्रेजी हिंदी, बंगला, कन्नड़, तमिल आदि भाषाओं पर पूरा का पूरा अधिकार था। ये एक बड़े उद्योगपति थे।मेरी उनसे पहली मुलाकात समाजवादी पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रथम लोकसभा के चुनाव में कन्नौज में हुई थी।बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव पूरब के आक्सफोर्ड इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता हुआ करते थे। अमरनाथ झा छात्रावास में रहा करते थे। मेरा निवास स्थान दारागंज में था। प्रातः 8:00 बजे के लगभग मेरे घर पर धर्मेंद्र यादव जी आए, साथ में बलराम सिंह यादव के सुपुत्र संग्राम यादव(वर्तमान विधायक) भी थे। धर्मेन्द्र यादव जी ने कहा सर टीपू भैया चुनाव कन्नौज से लड़ेंगे आपका पूरा सहयोग चाहिए। उस समय मैं समाजवादी पार्टी के युवजन सभा का पदाधिकारी था। मैं अपने साथ 11 -12 टाटा सुमो गाड़ियों के साथ कन्नौज अखिलेश यादव के प्रथम नामांकन( लोकसभा) में चलने के लिए तैयार हो गया। कन्नौज में मेरी प्रथम मुलाकात ठाकुर अमर सिंह से हुई थी।यह बात सन् 2000की थी। मैं अमर सिंह से मिला और उनसे मैने कहा कि मै बीरेंद्र सिंह आजमगढ़ से हूं चूंकि अमर सिंह जी भी आजमगढ़ के तरवां के रहने वाले थे और वैस क्षत्रिय थे। मैं आपका मोबाइल नंबर चाहता हूं और मुलाकात करने के लिए दिल्ली आना चाहता हूं। वह अपनी गाड़ी रुकवा कर गाड़ी का शीशा खोल कर तत्काल मोबाइल नंबर एवं लैंडलाइन नंबर भी दिए साथ ही अपने निजी सचिव प्रदीप कपूर का मोबाइल नंबर भी दिए थे। आगे उन्होंने कहा कि वीरेन्द्र जी जरूर आप दिल्ली आइएगा समय निकालकर। मैं अक्सर दिल्ली जाता रहता था।उनके ग्रेटर कैलाश के मकान एवं नार्थ एवेन्यू के सरकारी आवास पर अक्सर मेरी मुलाकात होती थी। एक बार की वाक्या मुझे अच्छी तरह से याद है, मेरे साथ हाईकोर्ट इलाहाबाद के हमारे अधिवक्ता साथी मनीष त्रिपाठी जी जो मूलतः गाजीपुर के रहने वाले थे एक पैरवी के संदर्भ में मुझको अमर सिंह के पास लेकर दिल्ली गए थे।गुजरात का गोधरा कांड हुआ था सन् 2002 का वाक्या है। यह अपने ऑफिस नॉर्थ एवेन्यू से ग्रेटर कैलाश की तरफ जब निकलने लगे तो उन्होंने अपनी गाड़ी में मुझे अपने साथ बैठा लिए और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बारे में मुझसे चर्चा परिचर्चा करने लगे। मुझसे उन्होंने कहा कि वीरेन्द्र जी आप प्रदेश के पदाधिकारी बनना चाहते हैं, मैंने कहा हां साहब मुझे भी प्रदेश का पदाधिकारी बनवा दीजिए। उन्होंने एक चिट्ठी अखिलेश यादव जो वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं के लिए लिखा।दूसरे दिन मैं फरक्का एक्सप्रेस से लखनऊ आया।अखिलेश यादव जी को यह सूचना पहले ही पहुंच गई थी। मैं समाजवादी पार्टी कार्यालय विक्रमादित्य मार्ग लखनऊ गया जहां अखिलेश यादव जी ने अपने हाथ से मुझे मिठाई खिलाई क्योंकि उनको पुत्री पैदा हुई थी। माननीय अमर सिंह जी का पत्र मैंने दिया। एक बार मैं दिल्ली में माननीय अमर सिंह के आवास पर बैठा हुआ था प्रेस – मीडिया वाले लोग आए हुए थे तभी सिनेस्टार अमरीशपुरी का फोन आया। अमर सिंह जी सहारा समूह में अपनी अच्छी दखल रखते थे। अमर सिंह ने कहा मुगाम्बो आपका काम हो जाएगा और तत्काल उन्होंने सुब्रत राय सहारा को फोन करके अमरीशपुरी का कार्य करवाया तदुपरांत अमर सिंह मुझसे मुखातिब हुए और कहे वीरेंद्र सिंह जी बाहर की दुनिया में हम राजनीतिक दल आपस में विरोधी जरूर होते हैं परंतु व्यक्तिगत मुझसे भारतीय जनता पार्टी के लोग हो या कांग्रेस के लोग हो चाहे वह दक्षिण भारत के बड़े से बड़े नेता हो अक्सर मुझसे ही काम करवाते हैं। मैं उनका काम बड़ी मजबूती और ईमानदारी के साथ करता हूं। एक बार का वाक्या और बताना चाहता हूं सिने स्टार अजय देवगन और उसकी पत्नी काजोल व मनोज तिवारी तत्कालीन गायक कलाकार व फिल्मी एक्टर अमर सिंह से मिलने आए हुए थे, तभी उनके निजी सचिव प्रदीप कपूर के मोबाइल पर ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का फोन आया कहा गया कि माननीय अमर सिंह से बात करनी है। कुछ देर बाद माननीय अमर सिंह हेमा मालिनी को कॉल बैक कर बात किया और उनकी भी मदद किया। अक्सर वह कहा करते थे कि मैं “दोस्तों का दोस्त और दुश्मनों का दुश्मन हूं। समाजवादी पार्टी को फर्श से अर्श तक पहुंचाने के लिए उन्होंने तन-मन- धन तीनों से मजबूती पूर्वक सहयोग किया था परंतु सन 2009 के बाद भारतीय राजनीति में अमर सिंह के साथ कई प्रकार की ऐसी घटनाएं घटित हुई जिससे वह अंदर से बहुत दुखी हुआ करते थे। मुझे अक्सर मोबाइल पर फोन करके कहते थे वीरेंद्र भाई यहां लोग एहसान फरामोश हैं, मैंने तो कितनों को विधायक, मंत्री,सांसद और कहां से कहां तक पहुंचा दिया। एक आप हो कभी कुछ मुझसे कहते नहीं हो आप चिंता ना करो आप मेरे दिल में रहते हो। एक बार तो उन्होंने मुझे फिल्म में काम करने के लिए भी कहा तो मैंने कहा साहब आपने मुझसे कहा था कि आप मेरे दिल में हो फिर फिल्म की बात क्यों करते हैं। अक्सर रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं, निराला की कविताओं को अपने भाषणों में कोट किया करते थे। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन कुछ नेताओं से उनके व्यक्तिगत विरोध हो गए थे जबकि कि वह कहा करते थे कि मैंने समाजवादी पार्टी को खून और पसीने से सीचा है वरना इन लोगों की औकात नहीं थी कि हेलीकॉप्टर से चल पाए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उस समय मुलायम सिंह यादव हुआ करते थे। उनके बारे में अमर सिंह कहते थे कि यह व्यक्ति किसी व्यक्ति को कहां प्रयोग किया जाता है अच्छी और बखूबी से जानते हैं। 2008 में “परमाणु अप्रसार संधि” जो भारत सरकार वह अमेरिका के बीच होना था देश में मनमोहन सिंह की सरकार थी अमर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से अमर सिंह की अच्छी दोस्ती थी। अमर सिंह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता हुआ करते थे।माननीय अमर सिंह जी का नाम “कैश फार वोट” में चर्चा मे आया था।2010 मे ये समाजवादी पार्टी से अलग होकर “राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी” बनाई थी।इलाहाबाद से बलिया तक पूर्वाचल राज्य के लिए पदयात्रा किए थे। मै भी उनके साथ हो लिया था।मेरे घर अक्सर उनके भाई अरविंद सिंह ,बृजेन्द्र सिंह व राष्ट्रीय लोकमंच के नेताओं का आना -जाना था।जयाप्रदा जी अंतिम दौर तक अमर सिंह के साथ थी।राजनीति मे अमर सिंह जी पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के करीबी थे। दक्षिण भारत के तत्कालीन प्रभावशाली नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा जी के ये अति सन्निकट हुआ करते थे। मुझसे अमर सिंह जी अक्सर फोन से बात किया करते थे।ये एक सफल पोलीटिकल मैनेजर थे।जोड़-तोड़ की राजनीति में चाणक्य के रुप मे थे। मोदीजी अक्सर इन्हे जमाई भाई बोला करते थे क्योंकि इनकी पत्नी श्रीमती पंकजा जी गुजरात से ही थी। इनके दो जुड़वा पुत्री दिशा सिंह और दृष्टि सिंह है। लेफ्ट नेता सरदार हरकिशन सिंह सुरजीत से अच्छे संबंध थे। अमिताभ बच्चन की अमर सिंह ने कई बार मदद की थी। बच्चन परिवार से किसी जमाने मे पारिवारिक संबन्ध हुआ करता था।वालीवुड व राजनीतिक घरानों के अलावा औद्योगिक घरानों से मधुर संबंध अमर सिंह का था।अंबानी परिवार अक्सर इनसे मिलने आता था। पूर्व प्रधानमंत्री चन्दशेखर जी के पदयात्रा मे ये सहयोग भी किए थे।इनका संबंध सभी दलों के सभी बड़े नेताओं से था।आजमगढ़ स्थित तरवां का मकान और अन्य संपत्ति अंत मे जनसंघ को दान कर दिये थे। आज यह शख्स इस दुनिया मे नहीं है मुझे बहुत दुख है।

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