‘सियासत के पहलवान’ पर आ रही है फिल्म “मैं मुलायम सिंह यादव”

(आनन्द कुमार)

कुश्ती के मैदान से निकले ‘सियासत के पहलवान’ मुलायम पर आ रही है फिल्म

भारतीय राजनीति के धुंरधर मुलायम सिंह यादव पर आ रही है फिल्म

ट्रेलर रीलिज, अक्टूबर में ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आ सकती है फिल्म

फिल्म का नाम – ‘मैं मुलायम सिंह यादव’

निर्माता- सेठी मंडर

निर्देशक- सुवेंदु घोष

मुख्य अभिनेता- अमित सेठी (मुलायम सिंह यादव के रोल में )

 मिमोह चक्रवर्ती (मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल के रोल में)

तो दोस्तों दिल, दिमाग और कुर्सी थाम कर बैठने के लिए तैयार हो जाइये क्योंकि भारतीय राजनीति के धुरंधर मुलायम सिह यादव पर फिल्म आ रही है, उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश के लोगों को इस फिल्म का बेसब्री से इंताजर होगा…क्योंकि नेता जी से इस प्रदेश का जितना लगाव है उतना ही प्रदेशवासियों का नेता जी से ऐसे में लोग अपने पूर्व मुखिया और उनकी कहानी पर बनी इस फिल्म को जरूर देखेंगे.

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव पर बन रही बायोपिक फिल्म का ट्रेलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया है.

ट्रेलर देखने के लिए यहां क्लिक करें-

https://youtu.be/6mEa3Ge2-44

फिल्म कब रीलिज होगी, कैसे होगी, फिल्म की मुख्य भूमिका में कौन है और कौन फिल्म का निर्माता निर्देशक है इसकी पूरी जानकारी तो हम आपको दे ही चुके हैं.

एक ऐसा शख्सियत जो अखाड़े की मैदान से निकलकर जब राजनीति के मैदान में कूदा तो उसने सियासत का अंदाज ही बदल दिया कुश्ती के मैदान निकले उस शख्स ने तीन बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना और एक बार देश का रक्षा मंत्री भी….

ये कौन नहीं जानता कि उत्तर प्रदेश की नींव पर ही दिल्ली का किला मजबूत या कमजोर होता है, उस उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब एक अखाड़े के पहलवान ने अपने पांव रखा तो राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों के पांव थरथराने लगें….

अखाड़े के दांव पेंच को सियासत के मैदान में जब इस पहलवान ने आजमाना शुरू किया….तो उत्तर प्रदेश कि राजनीति में जल्द ही उसकी अहमियत बनने लगी…यूपी की सियासत में जब उसने दखलंदाजी देने शुरू कि तो थोड़े ही दिन में यूपी से कांग्रेस की सीटों में सेंध लगनी शुरू हो गई… और दिल्ली की सियासत भी गैर कांग्रेस यूपी के सहारे हो गयी… वैसे तो उसने उत्तर प्रदेश में राजनीति का एक ऐसा तिलिस्म खड़ा किया जो उसके बिना आज भी अधूरा है… उस शख्स का नाम है मुलायम सिंह यादव …मुलायम नाम के भले मुलायम थे…लेकिन राजनीति में वो दुश्मनों और विरोधियों के लिए काफी सख्त बने रहे….

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अखाड़े का मंझा खिलाड़ी जब राजनीति के मैदान में पूरे दम-खम से उतरा तो बिल्कुल मंझे खिलाड़ी की तरह ही… यूपी की राजनीति का हर नब्ज टटोल कर वो राजनीति करता रहा…और बड़े-बड़ों को अपने सियासी दांव पेंच से चित्त करता रहा….

देखते ही देखते ही यूपी की राजनीति गणित पूरी तरह मुलायम के हाथों में ही आ गई… जब जरूरत पड़ी तो मायावती का साथ लेकर राजनीति पारी खेली… तो वहीं मन और मौके के हिसाब से ऐसी दूरी बनायी की दोस्ती दुश्मनी में बदल गयी…. इतना ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक तरफा राज करने के बाद…जब रिटायरमेंट का समय आया…तो उन्होंने अपने राजनीति की गद्दी पुत्र को बहुत ही कूटनीति तरीके से सौंपी…हालांकि इस दौरान घरेलू कलह भी हुआ…लेकिन सियासत के महारथी ने परिवार को भी बिखरने से रोकेने के लिए हर संभव कोशिश की…कई लोग इस कलह को भी मुलायम की सियासत बताते रहे….खैर ये तो मुलायाम ही जानते होंगे…लेकिन जिस तरह से उन्होंने सियासत और रिश्तों को एक डोर से बांध रखा है…उसको समझना आसान नहीं है…. पिता से सियासत का ककहरा….सीख अखिलेख ने भी यूपी की राजीनित में गजब के दांव पेंच चले…कभी सबसे बड़ी दुश्मन को गले लगाया…तो कभी कांग्रेस के युवराज राहुल का हाथ थाम उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की…हालांकि मोदी लहर के सामने उनकी एक ना चली…लेकिन अखिलेश ने जरूर साबित कर दिया कि…जरूरत और मौके के हिसाब से वो सियासत का हर दांव खेलने में सक्षम हैं….

जल्द ही मुलायम यूपी से ही दिल्ली की सियासी गणित के सूत्रधार बन गए…राजधानी की सस्ता का बागडोर उन्होंने कई बार अपने हाथों में रखी…एक मौका तो ऐसा भी आया जब वो खुद प्रधानमंत्री के उम्मीदवार बन गए थे…लेकिन ऐसा हो नहीं सका…हालांकि कई बार ऐसा जरूर हुआ जब उन्होंने सियासत की हवा का रूख मोड़ दिया हो….प्रधानमंत्री कौन होगा…ये उनके दखल के बिना संभव नहीं था….ऐसे शख्स जिसके हजारों नहीं लाखों प्रशंसक हो जिनके करोड़ों शुभचिंतक हैं….और देश की सियसात जिसकी कायल हो….वो कोई और नहीं वह मुलायम हैं आज भी राजनीति की पारी में उनकी बुजुर्गियत भले ही दूरी बनाई हुई है लेकिन जरूरत पड़ती है तो अपने सधे अंदाज में अपने कुश्ती के दिमाग से मुलायम अब भी राजनीति के मैदान में वह खिलाड़ी हैं की एक बार विरोधियों को उनके राजनीति के शतरंज की चाल के बारे में सोचना पड़ता है कि यह सब कौन सी चाल कब चलें किसकी पासा कब पलट दे कोई नहीं जानता….

हम आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में मूर्ती देवी व सुधर सिंह के घर किसान परिवार में हुआ था… मुलायम सिंह अपने पांच भाई-बहनों में रतनसिंह से छोटे व अभयराम सिंह, शिवपाल सिंह, रामगोपाल सिंह और कमला देवी से बड़े हैं…पिता सुधर सिंह उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे किन्तु पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थू सिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया…और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा…..

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