चर्चा में

कब जागोगे हुज़ूर! कहीं देर ना हो जाए!

यही तो शासन सत्ता और साहब लोगों की पहचान है! अगर अपने टैक्सों की वसूली करनी है तो किसी भी हद तक गुज़र जाएँगे! लेकिन उन्हें ना तो अपने व्यापारियों की चिंता है और ना फ़िक्र उन्हें तो मतलब है बस अपने टारगेट से!

@आनन्द कुमार…

1- व्यापारियों के व्यवसाय का क्या हाल है!

2- व्यापारी से जो उधार लिए उनकी देयता का हाल क्या है!

3- बाज़ार में ग्राहकों की चहल पहल कितनी है!

4- आनलाइन बाज़ार ने कैसे कमर तोड़ा है!

5- लोगों की इच्छाशक्ति तो है की ख़रीदारी करें लेकिन उनकी आमदनी पर असर है!

6- दुकान में माल तो सरकार को टैक्स तो जमा है लेकिन बिक्री नहीं!

7- व्यवसायिक स्थल पर कार्य करने वाले कर्मियों व किराया जुटाना मुश्किल है!

8- कितने जीएसटी और नॉन जीएसटी फर्म बंद हो गये!

9- व्यवसाय करना अब जुनून नहीं अब डर हो गया है !

10- व्यापारी हित की बात केवल मंचों तक सीमित है धरातल पर नहीं!

11- बड़े व्यवसाय या कुछ व्यवसाय के निमित्त मात्र चलने से व्यवसाय की असली तस्वीर नहीं देखी जा सकती! जबकि सरकार अध्ययन कर ले व्यापार का हालात यही है की कुल सौ प्रतिशत के व्यापार में हर क्षेत्र के सिर्फ 10 प्रतिशत व्यवसायी ही ठीक ठाक से व्यवसाय कर पा रहे हैं 90 प्रतिशत का बुरा हाल है!

12- हां फुटपाथ के व्यवसाय में यही तुलना दूसरा हो सकता है उनके अच्छे चलन 80 प्रतिशत हो सकते 20 प्रतिशत कमजोर!

13- सरकार जीएसटी की आय को ही व्यापार मानती है लेकिन उसे यह भी देखना होगी की रूटीन की बिक्री क्या है क्योंकि सरकार को दिया गया टैक्स का अधिकतर माल दुकान, शोरूम, गोदाम या कारख़ाने में डंप रहता है और सरकार उसपर पाए टैक्स को यह समझती है की माल बिक गया और उसे टैक्स मिल गया!

14- बाकी सरकार के बाबा आदम के जमाने के बनाए गए व्यापार के लिए नियम कितने कारगर हैं! व्यापारी के लिए कितनी सुगमता व सरलता वाली है यह सभी जानते हैं!

15- मैं व्यापार व व्यापारी का समर्थन तो करता हूँ लेकिन टैक्स चोरी करने वाले व्यापारी का नहीं क्योंकि अगर वे टैक्स चुरा कर व्यापार कर रहे तो उनका टैक्स चोरी तो अलग व xtra आमदनी है!

बाकी मर्जी सरकार की है सिर्फ अपने वसूली पर ही ध्यान देगी तो वह दिन दूर नहीं की व्यापारी सड़कों पर होगा और सरकार के हाथ में कटोरा! व्यापारी कहेगा हमें भी खाने के लिए राशन दे दो क्या जरूरत है कमाने की जब वाजिब कमाई ही नहीं है!

व्यापारियों की आवाज़ बनिए इस बात को शेयर करिए की सरकार व्यवसाय को लेकर जो घमंड की नींद में सो रही है वह जागे! हर पढ़ें लिखे लोग व्यापार के लिए अच्छी पालिसी नहीं बना सकते। जो बना सकते हो सकता हैं हो सकता है वे उस कुर्सी से दूर हों! कुछ करिए वर्ना आगे नौकरी नहीं है और व्यापार का बुरा हाल है तो देश चलेगा कैसे! आज सरकार टैक्स वसूल ले रही है कल व्यापार ही जिंदा नहीं बचेगा तो टैक्स कैसे वसूलेगी!

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