उत्तर प्रदेश

वनवासियों के मध्य रोमांचित हुये मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स

पलियाकलां-खीरी। राष्ट्रीय चिकित्सक संगठन के बैनर तले गोरक्षनाथ चिकित्सा यात्रा में सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को निःशुल्क चिकित्सकीय सहायता देने उत्तर प्रदेश इंडोनेपाल सीमा से सटे जनपद खीरी पहुँची उनत्तीस डॉक्टरों की टीम को सोलह स्थानों पर कैम्प करने के पश्चात सीमावर्ती आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, रहन सहन व खान पान आदि को नजदीक से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
बताते चले कि निःशुल्क कैम्प करने आये चिकित्सकों को अलग अलग टोलियों में वनवासी थारू परिवार में ठहरने व भोजन की व्यवस्था की गई थीं जहाँ दो रातों व दो दिनों तक डॉक्टरों ने मरीजों हेतु सतत परिश्रम किया वहीं फुर्सत के क्षणों में भारत नेपाल सीमा व दुधवा रास्ट्रीय देखने व दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के मध्य जंगली जानवरों के साये में निवास करने वाली वनवासी थारू संस्कृति को भी निकट से अनुभव किया। चिकित्सा विज्ञान संस्थान वाराणसी से आये डॉ अजय सिंह पटेल ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में आकर मरीजों की सेवा करना मेरे लिये काफी रोमांचक अनुभव रहा मैं अपने जीवन के तीन वर्ष इस क्षेत्र में वनवासियों की सेवा हेतु देना चाहता हूँ। डॉ0 मंजीत सिंह यादव ने महाराणा प्रताप के वंशजों के मध्य स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया।

उत्तर प्रदेश सरकार में सलाहकार समिति के सदस्य ग्राम बरबटा निवासी शारदा प्रताप राणा ने डॉक्टरों को वनवासियों का इतिहास बतलाते हुये कहा कि मुगलों से युद्ध के बाद महाराणा प्रताप की सेनानी हमारे वंशजों ने निर्वासित जीवन व्यतीत कर घनघोर जंगलों में रहना स्वीकार किया किन्तु मुगलों की दासता स्वीकार नहीं की।
डॉ0 सोनाली वान्या ने वनवासियों के साथ बिताये समय को सुखद अनुभव बतलाया तो वहीं डॉ0 अंकिता ने आदिवासी परम्परागत परिधानों को पहनकर देखा। डॉ व्योम मिश्रा में बताया कि फिल्मों आदि के माध्यम से वनवासियों की जो छवि मनोमस्तिष्क में थी उसके बिल्कुल विपरीत मेरा अनुभव रहा है आदिवासी समाज के लोग बहुत सभ्य, सरल और राष्ट्रवादी विचारधारा के हैं जो वास्तव में अतिथि सेवा को देवसेवा तुल्य ही मानते हैं।
डॉ अमेय अग्रवाल ने क्षेत्रीय समस्याओं को गंभीरता से लेते हुये स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने पर बल देते हुये अपने अनुभवों को साझा किया। डॉ0 सुरेंद्र ने स्थानीय लोगों के वयक्तित्व व सहृदयता की सराहना की तो वहीं डॉ0 राहुल ने क्षेत्र में उच्चशिक्षा की आवश्यताओं को बतलाया। इसके अलावा अन्य डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ ने भी दुधवा की जैवविविधताओं, थारू संस्कृति, भाषा, आदि पर सकारात्मक विचार व्यक्त करते हुये वनवासी क्षेत्रों हेतु उच्चस्तरीय चिकिसकीय सुविधाओं पर बल दिया।

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