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‘मेरी माटी-मेरा देश’ कार्यक्रम के अन्तर्गत शिलाफलकम का लोकार्पण

० आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हुआ कार्यक्रम, लाखों अमर सपूतों के बलिदान से मिली हमारी आजादी हमारी आत्मा है : अरशद जमाल

मऊ। प्रधानमंत्री के आवाह्न पर आज 9 अगस्त से ‘मेरी माटी-मेरा देश’ अभियान शुरू हो गया है। यह अभियान केंद्र सरकार द्वारा आज से ‘मेरी माटी-मेरा देश’ के नाम से एक महत्वपूर्ण अभियान के रूप में आरम्भ हो रहा है जो आगामी 30 अगस्त तक चलेगा। इस अभियान के तहत आज से देशभर में शहीदों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम सम्पन्न किये जायेंगे जिसमें उनके बलिदानों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जायेगी।
इस अवसर पर नगर पालिका परिषद ने भी ‘मेरी माटी-मेरा देश’ अभियान के अन्तर्गत कार्यक्रम को नगर स्थित निजामुद्दीनपुरा पार्क में पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल, सभासदगण, अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में आम जन को पंच प्रण शपथ तथा शिलाफलकम के लोकार्पण के साथ आरम्भ कर दिया है। इस शिलाफलकम का लोकार्पण पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने किया।
इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष ने आम नागरिकों को इस सम्बन्ध में बताते हुये कहा कि आज का यह दिन हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि हमें आजादी के संदर्भ में आजादी की लम्बी लड़ाई की जानकारी तो है परन्तु उसकी वास्तविक पीड़ा से हम वाकिफ नहीं हैं जिसे हमारे बुजर्गो ने अपने तन पर झेला है तथा इस आजादी को हम तक हस्तांत्रित करने हेतु अपने प्राणों की आहूति दी है। उन्होंने कहा कि आज हम उन्हीं के बलिदानों को याद करने हेतु इस शिलाफलकम का लोकार्पण कर रहे हैं ताकि हमें उन श्हीदों की कुर्बानियों की वास्तविक अनुभूति हो सके। शहीदों की याद में स्मारक पट्टिका लगाने, एवं तीनों सेनाओं के जवानों का देशभर की ग्राम पंचायतों का दौरा करने का उद्देश्य यह है कि हम अपने देश पर मर मिटने वाले स्वतंत्रता संगा्रम सेनानियों एवं हमारे जवानों को जो वीर गति को प्राप्त हो चुके हैं को श्रद्धांजलि दें। उन्हांेने कहा कि सार यह है कि हमारी आजादी हमारी आत्मा है जिसके लिये देश के लाखों सपूतों ने अपनी जानें कुर्बान की हैं।
अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि हमारे देश की यह सुन्दरता है कि यह अनेकता में एकता का प्रतीक है। हमारे पूर्वजों ने संयुक्त रूप से इसे अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करा कर इसे हमें सौंपा था। उनकी मंशा के अनुरूप हमें देशहित में अपने दायित्वों का निर्वहन करने में तत्पर रहने की आवश्यकता है।

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