NBAIM ने मनाया 25वाँ स्थापना दिवस, नीतिगत संवाद और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पहल
मऊ। राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो (ICAR-NBAIM), कुश्मौर ने 1 जून 2025 को अपने 25वें स्थापना दिवस का आयोजन अत्यंत भव्यता एवं वैज्ञानिक गरिमा के साथ किया। यह आयोजन वैज्ञानिक नवाचार, नीति संवाद और ‘लैब से खेत‘ तक तकनीक हस्तांतरण की दृष्टि से एक ऐतिहासिक अवसर सिद्ध हुआ। देशभर से वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, किसान प्रतिनिधियों, औद्योगिक साझेदारों, छात्रों और मीडिया प्रतिनिधियों ने इस समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह कार्यक्रम “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सूक्ष्मजीवों पर आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुँचाना और किसानों को जैविक एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से जोड़ना था। इस अवसर के मुख्य अतिथि, पूर्व सचिव (DARE) एवं महानिदेशक (ICAR) डॉ. मंगला राय ने कहा कि कृषि के सतत विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्व चक्र, रोग-प्रतिरोध और पर्यावरणीय संतुलन में योगदान देते हैं। यदि भारत को रसायन-मुक्त और टिकाऊ कृषि की ओर बढ़ना है, तो सूक्ष्मजीव आधारित समाधानों को अनुसंधान और नीति दोनों स्तरों पर प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने ICAR-NBAIM की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस परिसर की नींव उन्होंने 25 वर्ष पूर्व रखी थी, वह आज जैव प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय नेतृत्व की दिशा में एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सूक्ष्मजीवों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और औद्योगिक उपयोग को राष्ट्रीय कृषि नीति का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे अनुसंधान को किसानों और नीति-निर्माताओं तक सुलभ बनाएं और जैव उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरल, साक्ष्य-आधारित पंजीकरण प्रणालियाँ विकसित करें। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों को उद्योग और कृषकों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करना होगा ताकि तकनीकों का सही प्रसार हो सके।
संस्थान के निदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव ने “NBAIM @25: विज्ञान, प्रगति एवं दृष्टिकोण” विषय पर प्रस्तुति देते हुए ब्यूरो की अब तक की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि NBAIM ने 9500 से अधिक कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों का संग्रह कर उन्हें NAIMCC में संरक्षित किया है, जो देश का एकमात्र ISO प्रमाणित कृषि माइक्रोबियल जीन बैंक है। ब्यूरो द्वारा जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, बायोस्टिमुलेंट्स, एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का विकास किया गया है। इन के माध्यम से देशभर में किसानों तथा उद्यमियों को तकनीकी सहयोग प्रदान करने जैसे कई महत्त्वपूर्ण कार्य संपन्न किए जा चुके हैं।
समारोह में उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड की संयुक्त निदेशक डॉ. वंदना सेठ, डॉ. के. एल. गुर्जर, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश सिंह, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर से डॉ. सुधीर कुमार, IARI से डॉ. राजीव कौशिक, एवं ब्यूरो के पूर्व निदेशकगण और उद्योग प्रतिनिधि भी मंच पर उपस्थित रहे। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने NBAIM द्वारा विकसित तकनीकों की गुणवत्ता और उनके क्षेत्रीय प्रयोगों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान “नीतिगत सहयोग, गुणवत्ता नियंत्रण एवं FCO 2022 के अनुरूप समायोजन, तथा उद्योग-अनुसंधान समन्वय: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. पी. के. चक्रवर्ती (पूर्व सदस्य, ASRB) ने की और सह-अध्यक्षता डॉ. अनिल कुमार सक्सेना (पूर्व निदेशक, NBAIM) ने की। चर्चा में वक्ताओं ने जैव उत्पादों की गुणवत्ता, पंजीकरण की पारदर्शिता, नीति निर्धारण की स्पष्टता, नवाचारों के व्यवसायीकरण और कृषि में उद्यमिता की आवश्यकता पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने यह साझा किया कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर पूर्व निदेशकों का सम्मान, NBAIM के उत्कृष्ट कर्मचारियों को पुरस्कार, प्रगतिशील किसानों और औद्योगिक भागीदारों का अभिनंदन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव, ब्यूरो के संथापक निदेशक डा दिलीप अरोरा द्वारा प्रेषित शुभकामना संदेशों को मंच से पढ़ा गया, जिनमें NBAIM की भूमिका की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों के साथ प्रयोगशाला एवं प्रदर्शनियों के अवलोकन, और वैज्ञानिकों व छात्रों के साथ संवाद से हुआ। अतिथियों ने ब्यूरो की सुविधाओं, शोध कार्यों और नवाचारों की सराहना की। स्थापना दिवस समारोह ने न केवल NBAIM की 25 वर्षों की यात्रा को रेखांकित किया, बल्कि यह सिद्ध किया कि जब विज्ञान, नीति और समाज एक साथ चलें, तो सूक्ष्मजीव आधारित कृषि नवाचार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस आधार बन सकते हैं।







