मऊ पुलिस ढूंढती रही लाइसेंसी हथियारों में खोट, पड़ोसी पुलिस खोज निकाली शहर में अवैध हथियारों की फैक्ट्री

( आनन्द कुमार )
मऊ। इसे दुर्भाग्य कहा जाए या मात्र संयोग कहा जाए या मऊ पुलिस की नाकामी कहा जाए या पड़ोसी पुलिस की कामयाबी कहा जाए। अवैध असलहे की फैक्ट्री का पता चलने व उसमें संलिप्त लोगों की गिरफ्तारी में मऊ पुलिस अपनी पीठ भले ही जितना चाहे थपथपा ले, लेकिन अतिसंवेदनशील शहर के अंदर इतने बड़े पैमाने पर अवैध असलहे की फैक्ट्री का पता चलना और पड़ोसी जनपद गोरखपुर व बिहार प्रदेश की पुलिस की सहयोग से उस पर कार्यवाई होना मऊ पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में जरूर खड़ी करती है ? ऐसे में इसे क्या कहा जाए, वैसे तो मऊ पुलिस जनपद में अब तक बने लाइसेंसी हथियारों में ही खोट निकाल उसको निरस्त करने की कार्रवाईयों में इतनी तेजी से जुड़ी रही कि उसे अवैध असलहे के कारखाने के बारे में कुछ भनक ही नहीं लगी ? सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि आखिर इस अवैध कारखाने में बनने वाले असलहे की खपत होती कहां थी ? अगर यहां से अन्य जनपदों में इन असलहों की सप्लाई थी, तो मऊ में खपत के रेसियो का सही आकलन कैसे पता चलेगा। सबसे गंभीर विषय तो यह है अतिव्यस्त भीड़-भाड़ वाले मुहल्ले में असलहा बनाने वालों ने कारखाना स्थापित कर दिलेरी का काम किया। क्या यह माना जाए कि हाफ ब्लेड या फिर छोटे-मोटे चाकू व कट्टा आदि के संग कभी कभार संलिप्त लोगों को गिरफ्तार कर, पुलिस इसे ही अपनी बड़ी कार्यवाई मानती है या बड़े घटनाओं की तरफ ताकना और झाकना ही नहीं चाहती है। ऐसे में इस अवैध कारखाने के पीछे के असली राजदार आने तो अभी बाकी हैं, लेकिन इस खेल में कौन पास है कौन फेल कहना मुश्किल है। हां, इतना जरूर कहना है, “योगी सरकार में अपराध व अपराधियों पर अंकुश तो खूब लगा, लेकिन अगर बिहार से आकर लोग मऊ में अवैध असलहे का कारखाना संचालित कर रहे हैं, तो आखिर इन बन रही असलहों की खपत कहां और क्यों हो रही है, यह जांच का और गंभीर विषय है। उम्मीद है, मऊ पुलिस इस पर चुप्पी तोड़ेगी और जिले की जनता को जवाब देगी। खैर मऊ के दो थानों में पकड़े गये अवैध असलहा के कारखाने का संचालन व गिरफ्तार लोगों के संदर्भ में थोड़ी देर में मऊ पुलिस का प्रेस नोट जारी होगा, फिर आपको रूबरू कराएंगे कि मऊ पुलिस क्या कह रही है।
Note… फोटो गूगल से साभार है, इस समाचार से कोई सरोकार नहीं है।




