काम की बात

स्वच्छता केवल साफ़-सफाई नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि और स्वस्थ पर्यावरण की बुनियाद: ICAR-NBAIM निदेशक

मऊ।स्वच्छता दिवस के अवसर पर आईसीएआर–राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो (एनबीएआईएम), मऊ द्वारा “स्वच्छ भारत अभियान” के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा के समापन समारोह के अवसर पर संस्थान के निदेशक डा. आलोक श्रीवास्तव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल साफ़-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टिकाऊ कृषि, सुरक्षित खाद्य प्रणाली और स्वस्थ पर्यावरण की बुनियाद है।

निदेशक ने कहा कि कृषि से जुड़े उपयोगी सूक्ष्मजीवों पर कार्य करने वाले एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान के रूप में आईसीएआर–एनबीएआईएम यह मानता है कि स्वच्छता का सीधा संबंध मिट्टी के स्वास्थ्य, जल की गुणवत्ता, फसल उत्पादकता और मानव स्वास्थ्य से है। अवैज्ञानिक ढंग से कचरा निपटान और अस्वच्छ वातावरण से हानिकारक रोगजनक सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे उपयोगी सूक्ष्मजीवों का संतुलन बिगड़ता है।

उन्होंने बताया कि आईसीएआर–एनबीएआईएम में स्वच्छता को शोध संस्कृति का अभिन्न अंग माना जाता है। इसके अंतर्गत हरित प्रयोगशालाओं का विकास, सूक्ष्मजीव अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान, एकल-उपयोग प्लास्टिक में कमी तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक जैव-अपशिष्ट अपघटन, प्रदूषित मिट्टी के सुधार तथा रसायनों पर निर्भरता कम करने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।

निदेशक ने कहा कि सही अर्थों में स्वच्छता का मतलब हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करना और उपयोगी सूक्ष्मजीवों को संरक्षित करना है। यह दृष्टिकोण ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘वन हेल्थ’ तथा सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। संस्थान द्वारा किसानों, छात्रों एवं आम नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित जनसंपर्क एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उन्होंने सभी वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, किसानों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि दैनिक आदत और वैज्ञानिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएँ, क्योंकि स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ राष्ट्र की नींव है।

प्रेस वक्तव्य में बताया गया कि आईसीएआर–एनबीएआईएम द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत 16 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक संस्थान स्तर पर कुल 16 सुनियोजित एवं बहुआयामी कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। पखवाड़े की शुरुआत स्वच्छता शपथ के सामूहिक आयोजन से की गई, जिसके अंतर्गत स्वच्छता संदेशों का प्रसार, सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री का प्रदर्शन तथा स्वच्छ भारत थीम पर सेल्फी बूथ की स्थापना की गई।

इसके पश्चात स्वच्छता जागरूकता दिवस के अवसर पर संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं ‘अपशिष्ट से संपदा’ तथा सुरक्षित अपशिष्ट निपटान विषयक तकनीकी प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। पखवाड़े के दौरान कार्यालयों एवं प्रयोगशालाओं में पुराने अभिलेखों की छंटाई, डिजिटलाइजेशन, कबाड़ निस्तारण तथा परिसर, गलियारों एवं आवासीय क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया।

हरित अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रमों के माध्यम से हरित क्षेत्रों के विस्तार, एकल-उपयोग प्लास्टिक के परित्याग, अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण तथा जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई गई। सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए श्रमदान कार्यक्रम, गांवों एवं सार्वजनिक स्थलों में स्वच्छता अभियान, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक, स्वच्छता रैलियाँ, प्लॉगिंग कार्यक्रम तथा सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

किसान दिवस के अवसर पर किसानों की भागीदारी से स्वच्छ कृषि परिवेश, खेत-स्तर पर स्वच्छता एवं श्रेष्ठ स्वच्छता प्रथाओं पर संवाद एवं अनुभव साझा किए गए। इस दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। विद्यालयी बच्चों एवं युवाओं के लिए चित्रकला, प्रश्नोत्तरी एवं निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से स्वच्छता के प्रति संस्कार विकसित करने का प्रयास किया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के समापन पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इन सभी गतिविधियों की उपलब्धियों को साझा किया गया। इन समस्त कार्यक्रमों में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, किसानों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे स्वच्छता को एक सतत जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त हुआ।

 

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