पुण्य स्मरण

ब्राह्मण विकास परिषद मऊ ने मनाई पं. मदन मोहन मालवीय व अटल बिहारी वाजपेई की जयंती

० महापुरुषों के विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत

मऊ।ब्राह्मण विकास परिषद, जनपद मऊ के तत्वावधान में चंद्रभानपुर स्थित परिषद कार्यालय पर आज भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय एवं पंडित अटल बिहारी वाजपेई की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परिषद के संरक्षक रामजी उपाध्याय ने कहा कि दोनों महापुरुषों ने समाज, राष्ट्र और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर पं. मदन मोहन मालवीय ने शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। आज भी ब्राह्मण विकास परिषद उनके आदर्शों के अनुरूप स्वास्थ्य, संस्कार और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय: शिक्षा का गौरवशाली केंद्र

रामजी उपाध्याय ने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय एशिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में शामिल है, जहाँ सभी विषयों का उच्च स्तरीय शिक्षण कार्य होता है। पं. मदन मोहन मालवीय और पं. अटल बिहारी वाजपेई—दोनों को उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अटल बिहारी वाजपेई की दूरदर्शी सोच

परिषद के अध्यक्ष ऋषिकेश पांडेय ने कहा कि पं. अटल बिहारी वाजपेई द्वारा शुरू की गई स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के कारण आज पूरा देश हाईवे नेटवर्क से जुड़ चुका है। सामाजिक सरोकारों के प्रति दोनों महापुरुषों का योगदान अद्वितीय, अकल्पनीय और अविश्वसनीय है।

जीवनी, गीत और भावनाओं से सजी बैठक

परिषद के महामंत्री संजय कुमार त्रिपाठी ने दोनों महापुरुषों के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान मृत्युंजय तिवारी ने गीत के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेई की प्रसिद्ध पंक्तियाँ “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा” प्रस्तुत कीं, जिसे सुनकर पूरा सभागार भावविभोर हो गया।

जय नारायण द्विवेदी ने परिषद द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान संरक्षक रामजी उपाध्याय मालवीय जी के आदर्शों पर चलते हुए संगठन को निरंतर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहे हैं।

कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर विजय शंकर तिवारी, संजय द्विवेदी, प्रणव चतुर्वेदी, विजय शंकर पांडे, ओम प्रकाश शुक्ला, विजय प्रताप दुबे, रमाकांत तिवारी, पं. मुनेंद्र मिश्र, दयाशंकर मिश्र, दुर्गावती मिश्रा, डॉ. लक्ष्मी शंकर दुबे, मणिकांत चतुर्वेदी, संजय कुमार उपाध्याय, नित्यानंद पांडेय, रामजापित पांडेय, शिव शंकर उपाध्याय, अशोक तिवारी, घनश्याम दुबे, श्याम सुंदर चौबे, डॉ. प्रमोद मिश्र, सत्य प्रकाश दुबे, धनंजय पांडेय, यशवंत उपाध्याय, जयशंकर दुबे, सत्येंद्र नाथ पांडेय, अरविंद पांडेय, डॉ. पंकज उपाध्याय, रामजी शास्त्री, अरुण कुमार मिश्रा, मनोज पांडेय, गोपाल तिवारी, मुरारी जी पांडेय एवं दिलीप पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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