रचनाकार

सुख-दुःख जीवन की राहों में, आते हैं वो आएंगे

@ प्रमोद कुमार”अनंग

“नवप्रभात”

तरह-तरह की दकियानूसी, छोड़ें चिंतन- मनन करें।
है बसुधा परिवार हमारा, नवप्रभात का जतन करें।।

यह मेरा है, वह तेरा है, क्या रखा इन बातों में।
सँवरे सुंदर प्रकृति हमारी,शुभ मुहूर्त शुभ लगन करें।।

नव किसलय पर तरुणाई का,स्वागत है अभिन्नदन है।
जिन लोगों ने पाला-पोसा,आओ उनका नमन करें।।

सागर से भी गहरी आंखे, लेकर आई एक परी।
देकर ढाई आखर अनुपम,क्यों न उसको मगन करें।।

जो बीता कुछ ज्ञान दे गया,अनुभव लेकर बढ़ जाएं।
दुहराई ना जाये गलती, हम विचार कुछ गहन करें।।

है अनेक पर्वों का देश हमारा,एक जुड़ा तो क्या।
जोड़ा है हमने ही सबको,काहे को विष-वमन करें।।

ताली- थाली लेकर आया, गजब मदारी दाढ़ी में।
रोज कट रही जेब मजे लो,अब तो लंका दहन करें।।

सुख-दुःख जीवन की राहों में, आते हैं वो आएंगे।
मस्त रहेंगे – स्वस्थ रहेंगे, सब प्रसन्न हो सहन करें।।…

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