मऊ में मृदा स्वास्थ्य परीक्षण पर केन्द्रित रही इंटरैक्टिव कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला

■ युवा किसानों एवं कृषि उद्यमियों को सिखाये गए मिट्टी के जैविक एवं परीक्षण एवं सूक्ष्मजीवों के पृथककरण के तरीके

■ राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में ३१ अगस्त से 04 सितम्बर 2021 तक पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला का दूसरा दिन

मऊ। मिट्टी के स्वास्थ्य से जुडी बारीकियों के विषय में व्यापक रूप से परिचित कराने के उद्देश्य को समर्पित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में चल रही पांच दिवसीय डी बी टी बायोटेक किसान कार्यशाला के दूसरे दिन किसानों एवं कृषि उद्यमियों को मिट्टी के जैविक एवं रासायनिक स्वास्थ्य की परीक्षण एवं सूक्ष्मजीवों पृथककरण विधियों के विषय में प्रायोगिक जानकारी दी गयी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ अलोक श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण प्रतिभागियों को सूक्ष्मजीवों के बारे में जानकारी तथा मृदा उर्वरता बढ़ाने में लाभदायक सूक्ष्मजीवों की महत्ता के विषय में इंटरैक्टिव प्रेजेंटेशन के माध्यम से रोचक तरीके से जानकारी दी। साथ ही उन्होनें उनकी प्रयोगशाला में चल रहे विभिन मुशरूमों के ऊपर कार्य के बारे में बताया। उन्होनें मशरुम उत्पादन के जरिये किसानों में उद्यमिता विकसित करें के फायदे बताये और प्रेरित किया. कार्यशाला के संयोजक एवं परियोजना सह अन्वेषक डॉ मागेश्वरन ने बताया की सभी किसानों को अपने खेतों की मिट्टी लाने के लिए पूर्व में ही सूचित कर दिया गया था। उन्होनें प्रशिक्षुओं को मिट्टी परीक्षण के वैज्ञानिक तरीकों से लेकर उसके अवयव परीक्षण तक के तौर तरीकों को प्रायोगिक रूप से बताया. इसी मिट्टी का एस टी एफ आर मशीन एवं मृदा परीक्षण किट के माध्यम से कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म तत्वों का परीक्षण करके भी दिखाया गया. साथ ही वैज्ञानिक डॉ शोभी थापा एवं ज्योति प्रकाश ने प्रयोगशाला में इन्हीं किसानों के खेतों की मिट्टी को ही बैक्टीरिया एवं फफूंदों के कल्चर मीडिया पर उनके ही सामने रोपित किया गया और इस प्रकार उनके मिट्टी में पाए जाने वाले जीवाणुओं की गणना के विषय में प्रशिक्षित किया गया. उन्होनें किसानों को सूक्ष्मजीवों के पृथककरण करने के तौर तरीकों और उसमें काम आने वाले अनेकों उपकरणों जैसे आटोक्लेव, लेमिनार एयर फ्लो, इन्क्युबेटर, पी एच एवं ई सी मीटर आदि के बारे में प्रयोगों के माध्यम से बताया. सस्य वैज्ञानिक डॉ आदर्श कुमार ने टिकाऊ कृषि हेतु एकीकृत पोषक तत्त्व प्रबंधन पर चर्चा की. परियोजना प्रभारी एवं NBAIM डी बी टी बायोटेक किसान हब फैसिलिटेटर डॉ रेनू ने प्रतिभागी किसानों को कृषि सम्बंधित वैज्ञानिक विधिओं के विभिन्न पहलुओं एवं पर्यावरण हितैषी सूक्ष्मजीव आधारित अनुकलापों के जानकारी दी। पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ ज्योति प्रकाश, आशीष, राजन, अमित, आस्था, विनीत आदि ने भाग लिया।

ब्यूरो के निदेशक डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने कहा की एनबीएआईएम हमेशा से ही जनपद के किसानों के लिए कार्य कर रहा है और ऐसे प्रायोगिक ‘इंटरैक्टिव लर्निंग’ प्रशिक्षणों के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की दूरी कम होगी और किसान वर्तमान में दोहन प्रणाली पर आधारित कृषि को छोड़कर मिट्टी के पारिस्थितिकी में संतुलन पैदा करने पर जोर देंगे। इसी उदेश से किसानों के बीच परस्पर संवाद बढाने और उन्हें प्रायोगिक वैज्ञानिक गतिविधियों से परिचित कराने के लिए जनपद और आस पास के किसानों को ब्यूरो की प्रयोगशालाओं में लाया गया है और उन्हें सूक्ष्मजीव आधारित त्वरित कम्पोस्टिंग एवं अन्य कृषि उपयोगी प्रक्रियाओं पर 5 दिनों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

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