खास-मेहमान

गाजीपुर की बेटी गीतांजलि श्री की पुस्तक ‘Tomb of Sand’ को बुकर पुरस्कार

० रेत समाधि है हिन्दी में पुस्तक का नाम

इतिहास को समेटे गाजीपुर की माटी अपने जर्रे जर्रे से हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा इतिहास लिखती रहती है जिसका नाम देश में ही नहीं विदेशों में भी होता है। गंगा नदी की गोद में रचा और बसा गाजीपुर अपने इतिहास का लोहा हर क्षेत्र में माना जाता है। आज गाजीपुर को गौरवान्वित किया है गाजीपुर की बेटी गीतांजलि श्री ने जिसकी पुस्तक ‘Tomb of Sand’ रेत समाधि को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला है‌। यह गाजीपुर और पूर्वांचल के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए गौरव की बात है। देश के बड़े से बड़े साहित्यकारों और लोगों ने कहा है कि भारत मैं किसी हिंदी पुस्तक को बुकर पुरस्कार मिला गौरव की बात है। लोगों ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय लेखन में हिंदी की नई पहचान है।

हमारे पूर्वांचल और गाजीपुर जनपद के लिए आज गौरव का दिन है। गाजीपुर जनपद के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के गोड़उर की निवासी देश की जानी मानी लेखिका और उपन्यासकार गीतांजलि श्री को उपन्यास रेत समाधि के लिए साल 2022 का अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज दिया गया है। जिसको लेकर जिले में खुशी का माहौल चहुंओर है। आईएएस अनिरुद्ध पांडेय की पुत्री गीतांजलि श्री का जन्म मैनपुरी में हुआ है।
बताते चले कि भारत के लिए बड़े गर्व की बात है। देश की जानी-मानी लेखिका और उपन्यासकार गीतांजलि श्री को उनके उपन्यास ‘Tomb of Sand’ के लिए साल 2022 का अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज दिया गया है। ये पहली बार है कि किसी हिंदी उपन्यास के लिए किसी लेखिका को दुनिया के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार पाने के बाद इस दिग्गज भारतीय लेखिका ने कहा कि मैंने कभी बुकर पुरस्कार का सपना नहीं देखा था, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकती हूं। मैं चकित, खुश, सम्मानित और विनम्र महसूस कर रही हूं। ये बिल्कुल सपने जैसा है।

हिंदी उपन्यास के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार
गीतांजलि श्री की ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को जब अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए ‘शॉर्टलिस्ट’ किया गया तो ये बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि ये उपन्यास बुकर प्राइज के लिए हिंदी भाषा की पहली कृति बन गया। इसके बाद अब 2022 का बुकर प्राइज भी इस उपन्यास को ही मिला है।
लेखिका और साहित्यकार गीतांजलि श्री का यह उपन्यास मूल रूप से हिंदी में ‘रेत समाधि’ के नाम से प्रकाशित हुई थी और इसका अंग्रेजी अनुवाद ‘’Tomb of Sand’’ नाम से डेजी रॉकवेल ने किया है। इस उपन्यास को बुकर के जूरी सदस्यों ने ‘शानदार’ बताया है।
जब ”Tomb of Sand” का सेलेक्शन बुकर के लिए किया गया था तो खुश होकर गीतांजलि श्री ने कहा था कि यह बहुत ही खास तरह की मान्यता है कि जब कोई काम दूर बैठे अज्ञात लोगों को आकर्षित करता है। यही सच्चा समर्थन है। काम अच्छा होना चाहिए, अनुवाद बेहतरीन होना चाहिए।
उन्होंने अनुवादकर्ता डेजी के लिए कहा कि ये मेरे और उनके लिए बहुत अच्छा पल है। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बुकर प्राइज भी मिलेगा।
50,000 पाउंड के साहित्यिक पुरस्कार के लिए पांच अन्य उपन्यासों में ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ ने बाजी मारी है। पुरस्कार की राशि लेखिका और अनुवादक के बीच विभाजित की जाएगी। लंदन पुस्तक मेले में घोषित अन्य शॉर्टलिस्ट किताबों में बोरा चुंग की ‘कर्स्ड बनी’ शामिल थी, जिसे कोरियाई से एंटोन हूर ने अनुवाद किया है। इसके अलावा जॉन फॉसे की ‘ए न्यू नेम: सेप्टोलॉजी VI-VII’ भी इस दौड़ में थी जिसे नार्वेई भाषा से डेमियन सियर्स ने अनुवाद किया था।

गीतांजलि श्री कहती हैं मुझसे कहा गया था कि यह लंदन है और मुझे यहां हर तरह से तैयार होकर आना चाहिए। यहां बारिश हो सकती है, बर्फ़ गिर सकती है, बादल भी घिर सकते हैं, धूप भी निकल सकती है. और शायद बुकर भी मिल सकता है। इसलिए मैं तैयार होकर आयी थी पर अब लग रहा है जैसे मैं तैयार नहीं हूं। बस अभिभूत हूं।गीतांजलि श्री ने उन तमाम लोगों को धन्यवाद दिया जो ‘रेत समाधि’ की यात्रा में एक ठंडी छांव की तरह उनके साथ रहे।”

गीतांजलि श्री स्व० अनिरुद्ध पांडेय ( आईएएस ग्राम गोंड़उर थाना करीमुद्दीनपुर जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) की सुपुत्री हैं।विश्व के प्रतिष्ठित पुरस्कार “बुकर प्राइज” से उनकी कृति “रेत समाधि” के लिए उनको सम्मानित किया गया है। इस किताब को अंग्रेजी भाषा में अनुवादित किया गया है। रेत समाधि एक बुजुर्ग महिला की भारत से पाकिस्तान यात्रा पर आधारित है।बुकर प्राइज के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय को वो भी हिन्दी लेखिका को प्रथम पुरस्कार मिला। इसमें 50हजार पौंड की धनराशि विजेता को दी जाती है। ज्ञात हो कि गीतांजलि जी का परिवार विगत चालिस साल से दिल्ली में रहता है। इनकी एक बहन व दो भाई हैं। भाई शैलेन्द्र पांडेय भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं। गाजीपुर जनपद की बेटी को प्राप्त इस शानदार उपलब्धि से गाजीपुर वासी खुद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

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