रचनाकार

गीत : क्या चाहती हो सुन्दर नारी

डॉ अलका अरोड़ा…
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क्या चाहती हो सुंदर नारी
विश्वास प्रेम से भरी हुई
तुम राग प्रीत की मूरत हो
जग को जीवन देने वाली
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क्यूं पीले पात सुखी आशा
दामन में अपने रखती हो
क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर
हर पल आगे तुम बढ़तीहो
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क्यूँ कुटिल वेदना के तानो को
सह करके मुस्काती हो
क्यूं जात पात रंगभेद से उठकर
ममता अपनी लुटाती हो
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क्यूँ नदी किनारे सांझ ढले
आंसू बनकर बह जाती हो
क्यूं मचल मचल कर सृष्टि को
मंदिर मस्जिद सा सजाती हो
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क्यूँ दीपों की माला बनकर
तुम सहज रूप में जलती हो
क्यूँ देव लोक की खुशबू को
इस धरती पर फैलाती हो
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मन के भीतर तेरे क्या है
क्यूं कभी नहीं जतलाती हो
क्यूं आगे बढ़कर इस जग को
कुंदन सा तुम चमकाती हो
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क्या चाहती हो सुंदर नारी
कुछ अपने मुख से तुम बोलो
विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम
अपना अंतर्मन खोलो
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लेखिका
कवियत्री ,लेखिका, थिएटर आर्टिस्ट प्रोफेसर- बी एफआइटी देहरादून

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