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घोसी उपचुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती की चुप्पी पर कौन पास, कौन फेल!

@आनन्द कुमार…

मऊ। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भले ही यूपी के 2022 के विधानसभा चुनाव में मात्र एक सीट पर निपट गई और 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा से गठबंधन के बाद बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर सकी। इन सब के बावजूद बसपा नेत्री मायावती के राजनैतिक गुणा गणित के अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित को समझना इतना आसान नहीं है।
उनकी पार्टी भले ही वर्तमान में राजनीति के न्यूनतम शिखर पर है लेकिन उनका अपने वोटरों पर पकड़ और टिकट बांटने के फार्मूले की रेसिपी राजनैतिक रुप से काफी महत्वपूर्ण है। तभी तो उनको मिलने वाले वोट प्रतिशत की मिस्ट्री की हिस्ट्री जल्दी किसी को समझ में नहीं आती है!
जल्द ही सम्पन्न हुए नगर निकाय के चुनाव में मऊ जनपद में बेहतरीन प्रदर्शन करने बाद भी बसपा मुखिया घोसी विधानसभा के होने बाले उपचुनाव में मौन हैं! आखिर कारण क्या है कोई बोलने को तैयार नहीं है! पार्टी के लोगों का कहना है मुखिया का आदेश सर्वोपरि जो आदेश देंगी हम सभी दौड़ पड़ेंगे। घोसी से बसपा के टिकट की चाह रखने वाले पार्टी से सम्पर्क करने की कोशिश किए बावजूद इसके मायावती ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया!
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भले ही इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा, लेकिन क्या उनकी घोसी विधानसभा के उपचुनाव पर नजर नहीं है! यह बात कुछ अटपटी सी लग रही है।
चुनाव न लड़ने के पीछे बसपा को जो पहला कारण समझ में आता है वह यह है कि वे किसी भी कीमत पर कोई चुनाव हारकर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अपने को कमजोर साबित नहीं करना चाहती! वहीं दूसरा कारण जो समझ में आ रहा है वह यह हो सकता है कि वे बसपा में दारा सिंह चौहान को जो सम्मान मायावती दी थी और 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद दारा बसपा से जिस तरह से मुंह मोड़ कर रूख भाजपा की ओर कर लिए तो कहीं राजनैतिक नाराजगी और मौके की नजाकत तो नहीं!
राजनैतिक सोच रखने वालों पर यकीन करें तो मायावती घोसी विधानसभा के उपचुनाव में प्रत्याशी न उतार अपनी राजनैतिक समझ की गुणा गणित के सहारे अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित का कैलकुलेशन कर हिसाब तो नहीं कर रही। क्योंकि बसपा से दारा सिंह चौहान के बेवफाई को जब वोटर्स जुबां पर रखे हैं तो मायावती की तो गजब की राजनैतिक माया है।
ऐसे में बसपा सुप्रीमो मायावती की चुप्पी पर घोसी के राजनैतिक संग्राम में कौन पास है और कौन फेल यह मतगणना के दिन ही पता चलेगा। लेकिन घोसी विधानसभा के उपचुनाव में मायावती की चुप्पी ने बोलने वालों की भी बोलती बंद कर दी है। और जनता जनार्दन है कि जो जिस दल का मिल रहा उसे उस हिसाब से आश्वासन देकर सिर्फ मुस्कुरा रही है और समर्थक अपने-अपने नेता की टैम्पू हाई किए हुए हैं ।

 

N.D.A और I.N.D.I.A. के बीच घोसी पहला और छोटा मुक़ाबला…

ऐसे में विधानसभा घोसी के उपचुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी न आना भी कहीं न कहीं घोसी के सियासत में कुछ ही वोट की बदौलत असर डालेगा । पिछली विधानसभा में कांग्रेस को मिला मुठ्ठी भर वोट उपचुनाव में किसकी ओर डायवर्ट होगा यह भविष्य के गर्त में है। लेकिन N.D.A और I.N.D.I.A. के बीच घोसी विधानसभा का उपचुनाव पहला और छोटा मुक़ाबला माना जा सकता है। अब भाजपा और सपा आमने सामने मुक़ाबले में हैं। कुछ छोटे दल और निर्दल प्रत्याशी मैदान में तीर मारने उतरे तो हैं लेकिन उनकी तीर से कोई और घायल होगा या तीर यूँ ही किसी के अग़ल बग़ल से निकल जाएगा। यह परिणाम आने के बाद पता चल जाएगा ।

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