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वाह रे, बापू, पटेल व अम्बेडकर के साथ पीएम व सीएम के तस्वीर पर पहना दी माला

समाज में कैस-कैसे लोग होते हैं उनको राजनीति के चकाचौंध में अगल-बगल कुछ दिखाई नहीं देता है, मिलिए ऐसे जनप्रतिनिधी से…

बुलन्दशहर। नगर पालिका परिषद बुलंदशहर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चेयरमैन के कार्यालय में चेयरमैन की मौजूदगी मे उनके आफिस में टंगी महापुरुषों की तस्वीर के साथ- साथ प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की तस्वीर पर माल्यार्पण की फोटो मीडिया के हाथ लगने व सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद काफी किरकिरी हो रही है। देश की आजादी के 72वें स्वतंत्रता दिवस के दिन नगर पालिका कर्मियों की बड़ी गलती सामने आई है। इस गलती के लिए नगर पालिका कर्मी जितने दोषी हैं उस से कम देश की आजादी में अपने को सेल्फी के साथ फोटो वायरल करने वाले इन नेताओं का भी दोष कम नहीं हैं। क्योंकि कम से कम इन्हें तो यह ध्यान देना चाहिए और जानना चाहिए की भारतीय संस्कृति और सभ्यता क्या कहती है और क्या नहीं। क्या उनकी यह जिम्मेदारी नहींं है कि वे जहांं उठते बैठते हैैं इन गम्भीर समस्याओं पर ध्यान दें।

नगर पालिका परिषद बुलंदशहर के कार्यालय मैं अध्यक्ष के चेंबर में उनके कुर्सी के पीछे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पटेल और बाबा साहेब डॉ०भीमराव अंबेडकर की फ़ोटो के साथ, पीएम मोदी, और यूपी के सीएम योगी की फ़ोटो टंगी है। सभी फोटो पर माला टंगा हुआ है। पता नहीं माला टांगने वाले व्यक्ति को यह पता था कि नहीं कि जीवित व्यक्ति पर माला नहीं टांगा जाता। लेकिन राष्ट्रीय महापुरुषों के साथ साथ वर्तमान के राजनीति के शिखर पुरूष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के चित्र पर माल्यार्पण की इस वायरल तस्वीर की घटना की जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है।

फ़ोटो में अपने शुभचिंतकों एवं अन्य नेताओं के साथ दिख रहे मनोज गर्ग बुलन्दशहर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन के साथ साथ भाजपाा के नेता हैंं। उनके साथ उनकी टीम बैठी हुई है जो मुस्कुरा भी रही है कम से कम इस फोटो के वायरल के बाद इन नेताओंं से यह पूछने का अधिकार तो भारत के हर नागरिक को है की जब उन्हेंं स्वतंत्रता दिवस मनाने नहीं आता तो मनाने का औचित्य क्या है। कम से कम तो यह तय है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के तस्वीर पर माला इन नेताओं के कमरे में कार्यालय में प्रवेश के पहले पड़ा होगा या अगर इनकी मौजूदगी में पड़ा है है तो दोनो रूप में यह कर क्या रहे थे। आधा दर्जन पीछे और पता नहीं कितना चेयरमैन साहब के आगे जनता बैठी है और किसी की भी नजर उस माले पर नहीं पड़ी। अलवत्ता चेयरमैन के सामने बैठे किसी शख्स ने फोटो खींच कर वायरल किया होगा या कोई आम नागरिक या पत्रकार। स्वतंत्रता दिवस के दिन जब महापुरूषों को याद करने का विशेष दिन होता है। उसी दिन देश के पीएम व सीएम की तस्वीर के साथ इस प्रकार का कृत्य शर्मनाक व निन्दनीय है। कहीं ना कहीं यह बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

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