गंगा स्नान
“अरे! साहब, ये बलात्कार कांड तो लगता है कुर्सी लेकर ही पीछा छोडेगा . वो साले दारु -मुर्गा उड़ाने वाले दो कौड़ी के पत्रकार भी अब हमारे सामने सीना तान के चल रहे हैं .”
“अरे! हर कुत्ते के दिन आते हैं ….हा हा हा ”
“साहेब ! आप हँस रहे हैं . यहाँ सोशल मीडिया पर जिसे देखो वही नेता बना जा रहा है . ऐसा लगता है जैसे आम आदमी जाग रहा है .”
“हा हा हा ….घबराते क्यों हो ? सत्तर साल में जागा क्या ?”
“क्या मतलब ? साहेब घबराएं न तो क्या करें ? सत्ता की मलाई क्या ऐसे ही चले जाने दें इन कीड़े-मकौडों के बलात्कार के लिए . कितने जतन कर के तो सत्ता मिली है .”
“हा हा हा ….राजनीति के रंग निराले . हमने हरियल तोते पाले . अरे! हमारे पास गंगा है ….हम जांच का काम पिंजरे के तोते को दे रहे हैं . चौदह सौ जांच पेंडिंग हैं . हमने अभी तक उनके यहाँ भर्तियाँ भी पूरी नहीं की हैं . इस देश की जनता जल्दी भूलती है …भावुक है …हा हा हा ….हम सी बी आई जांच की घोषणा कर रहे है . ये गंगा जब खुद साफ़ नहीं हो सकी तो इसका स्नान ही बचाव है ….गंगा स्नान ….हा हा हा .”
नेता ने राहत की साँस ली और पूरा गिलास गटक गया .
शब्द मसीहा


यथार्थ